विवाह और तलाक के नियमों में बदलाव
UCC के तहत विवाह के पंजीकरण और उससे जुड़े कानूनी मामलों के लिए एक समान प्रक्रिया का प्रावधान है। इसमें एकविवाह की व्यवस्था भी शामिल है, यानी पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने पर रोक रहेगी। तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।
लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानून के दायरे में लाया गया है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे संबंधों का पंजीकरण कराने का प्रावधान किया गया है। इससे संबंधित अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी कानूनी ढांचे में शामिल किया गया है।
बेटियों और बेटों के अधिकारों में समानता
उत्तराधिकार के मामलों में भी UCC के तहत समान नियम लागू करने का प्रावधान है। संपत्ति के उत्तराधिकार में बेटियों और बेटों को समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। बिना वसीयत के मृत्यु होने पर जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के उत्तराधिकार से जुड़े अधिकार भी कानून के अनुसार तय होंगे।
लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों और गोद लिए गए बच्चों के अधिकारों को भी कानूनी सुरक्षा देने की व्यवस्था इसमें शामिल है।
अनुसूचित जनजातियों को छूट
गुजरात UCC के प्रावधानों में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को छूट दी गई है। इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखने की बात कही गई है।
गुजरात विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से भी इसकी पुष्टि हुई थी। गृह मंत्रालय ने 25 मार्च 2026 को विधेयक पारित होने पर गुजरात सरकार और समर्थन करने वाले विधायकों को बधाई दी थी।
इस कानून का विस्तृत असर इसके लागू होने की अधिसूचना और नियमों के अनुसार सामने आएगा। विधेयक के मूल पाठ में भी कहा गया है कि कानून को प्रभावी करने की तारीख राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के जरिए तय करेगी।
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