सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है हाथी
धार्मिक मान्यता के अनुसार हाथी पर देवी का आगमन शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक परंपरा में हाथी को स्थिरता, वैभव और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से इस नवरात्र को सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति की दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।
नौ दिन तक होगी देवी की आराधना
11 अक्टूबर 2026 (रविवार): आश्विन शुक्ल प्रतिपदा: मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना।
12 अक्टूबर 2026 (सोमवार): आश्विन शुक्ल द्वितीया: मां ब्रह्मचारिणी पूजा।
13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): आश्विन शुक्ल तृतीया: मां चंद्रघंटा पूजा।
14 अक्टूबर 2026 (बुधवार): आश्विन शुक्ल चतुर्थी: मां कूष्मांडा पूजा।
15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार): आश्विन शुक्ल पंचमी: मां स्कंदमाता पूजा।
16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार): आश्विन शुक्ल षष्ठी: मां कात्यायनी पूजा।
17 अक्टूबर 2026 (शनिवार): आश्विन शुक्ल सप्तमी: मां कालरात्रि पूजा।
18 अक्टूबर 2026 (रविवार): आश्विन शुक्ल सप्तमी/अष्टमी: मां महागौरी पूजा और दुर्गा अष्टमी व्रत।
19 अक्टूबर 2026 (सोमवार): आश्विन शुक्ल अष्टमी/नवमी: मां सिद्धिदात्री पूजा, महाअष्टमी-नवमी पूजन और कन्या पूजन।
20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): आश्विन शुक्ल दशमी: विजयादशमी यानी दशहरा और दुर्गा विसर्जन।
कई शुभ योगों का भी संयोग
नवरात्र के दौरान कुछ विशेष योग भी बन रहे हैं। 14 अक्टूबर को चतुर्थी पर अमृत सिद्धि योग रहेगा। वहीं 18 अक्टूबर को सप्तमी और 19 अक्टूबर को महाअष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बताया गया है। इन तिथियों में रवियोग भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ऐसे योगों में देवी आराधना के साथ भूमि, भवन, वाहन, आभूषण और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना भी मंगलकारी माना जाता है।

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