1. खतौनी से शुरू करें जांच
सबसे पहले मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड में जमीन किसके नाम दर्ज है, यह देखें। खातेदार का नाम, खाता और गाटा संख्या के साथ जमीन का क्षेत्रफल भी जांच लें। विक्रेता की बताई जानकारी और रिकॉर्ड में अंतर हो तो उसे नजरअंदाज न करें।
2. जमीन की पिछली कहानी समझें
वर्तमान मालिक के पास जमीन पहुंची कैसे, इसका पता पुराने बैनामे या रजिस्ट्री से लगाया जा सकता है। पुराने दस्तावेजों को ध्यान से देखें और उनमें लिखी जमीन की पहचान को मौजूदा रिकॉर्ड से मिलाएं।
3. नाम बदलने का रिकॉर्ड देखें
जमीन के स्वामित्व में बदलाव के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण किया गया है या नहीं, इसकी जानकारी लेना जरूरी है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि पुराने कागजात और वर्तमान रिकॉर्ड के बीच बदलाव कब और किस आधार पर हुआ।
4. गाटा नंबर को ज्यादा महत्व दें
जमीन की पहचान में गाटा संख्या अहम होती है। दस्तावेजों में लिखे गाटा नंबर, रकबे और खाता संख्या का मिलान करें। सिर्फ मोहल्ले, गांव या आसपास की पहचान के आधार पर जमीन तय करना ठीक नहीं है।
5. नक्शे के साथ जमीन पर भी जाएं
कागजों में जमीन सही होने के बावजूद मौके की स्थिति अलग हो सकती है। भू-नक्शे में दर्ज स्थिति को वास्तविक जमीन से मिलाएं। उसकी चारों दिशाओं की सीमा और आसपास की जमीन भी देखकर संतुष्ट हों।
6. किसी दावे या बंधक की जानकारी लें
सौदा करने से पहले यह भी जांचें कि जमीन पर किसी तरह का कर्ज, बंधक या कानूनी विवाद तो नहीं चल रहा। अगर किसी मामले की जानकारी सामने आती है तो बिना कानूनी सलाह के आगे बढ़ने से बचें।
7. पंजीकरण रिकॉर्ड से अंतिम पुष्टि करें
जमीन के पुराने दस्तावेजों और उपलब्ध पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड में जानकारी का मिलान करें। खासकर ऐसी संपत्ति में यह जांच जरूरी है जिसे पहले कई बार बेचा जा चुका हो।
कागजों में गड़बड़ी दिखे तो रोक दें सौदा
अगर अलग-अलग दस्तावेजों में नाम, गाटा संख्या, क्षेत्रफल या जमीन की स्थिति को लेकर फर्क दिखाई दे तो तुरंत भुगतान करने की जल्दबाजी न करें। पहले रिकॉर्ड में अंतर की वजह स्पष्ट कराएं। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग या कानूनी विशेषज्ञ से दस्तावेजों का सत्यापन कराने के बाद ही आगे बढ़ना समझदारी होगी।

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