फिलहाल पीएम-आशा की मूल्य समर्थन योजना के तहत एमएसपी पर खरीद राज्य सरकार के अनुरोध के बाद शुरू होती है। इस प्रक्रिया में बाजार भाव गिरने और सरकारी खरीद शुरू होने के बीच समय लग सकता है। सरकार इसी अंतर को कम करना चाहती है, ताकि किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी न पड़े।
पहले से तैयार रहेगा खरीद का सिस्टम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेफेड और एनसीसीएफ को खरीद की बेहतर तैयारी के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिला स्तर पर फसल उत्पादन, मंडियों में संभावित आवक और भंडारण क्षमता का पहले से आकलन किया जाएगा। इससे फसल मंडी में पहुंचने से पहले ही खरीद की व्यवस्था तैयार रखने में मदद मिलेगी।
इस बदलाव का फायदा खासतौर पर दलहन और तिलहन उत्पादकों को मिल सकता है, क्योंकि इन फसलों के लिए धान और गेहूं की तुलना में सरकारी खरीद का नेटवर्क अभी सीमित है। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
वहीं तूर, उड़द और मसूर की पूरी उपज खरीदने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। तिलहन के मामले में मूल्य अंतर भुगतान का विकल्प भी है, जिसके तहत एमएसपी और मंडी भाव के बीच का अंतर किसानों को दिया जाता है। इस फैसले से किसानों की टेंशन दूर होगी और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा।

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