पटना। बिहार में किरायेदारी अब और आसान होने वाली है। राज्य सरकार ने रेंट और लीज एग्रीमेंट की फीस को आधा करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे किराएदारों को कानूनी सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा। इस बदलाव की तैयारी के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है, जो नई दरें जल्द पेश करेगी।
राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस बदलाव के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी जल्द ही नई दरों का प्रस्ताव पेश करेगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ पटना समेत पूरे राज्य में रहने वाले किरायेदारों को मिलेगा, जिन्होंने महंगी रजिस्ट्रेशन फीस के कारण अब तक एग्रीमेंट कराने से बचते रहे।
किराएदारों की जेब पर होगा असर
पटना नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में करीब 3 लाख 10 हजार घर रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 10 लाख से अधिक लोग किराए पर रहते हैं। वर्तमान में किराएदारों को रेंट एग्रीमेंट के लिए कुल किराए का 0.5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और 2 प्रतिशत निबंधन शुल्क देना पड़ता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कुल किराया 10 लाख रुपए है, तो स्टांप ड्यूटी 5 हजार और निबंधन शुल्क 20 हजार रुपए होता है। 10 साल के एग्रीमेंट के लिए कुल खर्च लगभग 25 हजार रुपए बन जाता है।
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट ही कानूनी तौर पर मान्य
विशेषज्ञ बताते हैं कि रेंट या लीज एग्रीमेंट केवल रजिस्ट्री के जरिए ही कानूनी सुरक्षा पाता है। नोटरी केवल गवाह के तौर पर काम करता है और विवाद की स्थिति में इसके दस्तावेज मान्य नहीं होते। इसलिए सभी एग्रीमेंट को रजिस्ट्री कराना जरूरी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि फीस घटने और जागरूकता बढ़ने से आने वाले समय में रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन बढ़ेगा। इससे किराएदारों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनका वित्तीय बोझ भी कम होगा।

0 comments:
Post a Comment