क्या है नया बदलाव?
पहले वर्क-फ्रॉम-होम कई कंपनियों में नीति के रूप में था, लेकिन कानून में इसकी कोई स्पष्ट पहचान नहीं थी। अब इसे आधिकारिक रूप से वैध कार्य प्रणाली माना गया है। इसका मतलब है कि:
1 .घर से या हाइब्रिड तरीके से काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
2 .सैलरी, छुट्टियां और अन्य सुविधाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
3 .कंपनी और कर्मचारी के बीच किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनी आधार मौजूद होगा।
4 .काम के घंटे और नियम स्पष्ट रूप से तय होंगे।
आईटी और सर्विस सेक्टर को फायदा
आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में यह सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होगा। अब कर्मचारियों को प्रमोशन, बोनस या अन्य लाभ में कटौती की चिंता नहीं होगी। पीएफ, ग्रेच्युटी और लीव बेनिफिट्स पहले की तरह मिलेंगे।
बिजनेस और लचीलापन
हाइब्रिड मॉडल कंपनियों की कार्यकुशलता को भी बढ़ाता है। महामारी, प्राकृतिक आपदा या ट्रैफिक प्रतिबंध जैसी स्थितियों में काम प्रभावित नहीं होगा। इससे कंपनियां अपने वैश्विक ग्राहकों को लगातार सेवाएं दे सकेंगी।
वर्क-लाइफ बैलेंस
घर से काम करने की सुविधा कर्मचारियों के जीवन में संतुलन लाती है। लंबा ट्रैफिक और ऑफिस आने-जाने की परेशानी कम होगी, तनाव घटेगा और उत्पादकता बढ़ेगी। हालांकि, कंपनियों को काम के घंटे और डिजिटल मॉनिटरिंग के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

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