बच्चों से शुरू होगी जागरूकता की मुहिम
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि तंबाकू के खिलाफ प्रभावी लड़ाई की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए। प्राथमिक कक्षाओं से ही पाठ्यक्रम और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में तंबाकू के दुष्प्रभावों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। इससे बच्चों और किशोरों में प्रारंभिक स्तर पर जागरूकता विकसित होगी।
कानून के सख्त पालन पर जोर होगा
बैठक में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। यह कानून तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करता है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि इसके सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनिवार्य
अब किसी भी शैक्षणिक संस्थान को मान्यता देते समय ‘तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान’ के दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विशेष अभियान चलाकर युवाओं में तंबाकू के तथाकथित ग्लैमर को खत्म करने की रणनीति बनाई जाएगी। पोस्टर, कार्यशाला, निबंध प्रतियोगिता और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संदेश पहुंचाया जाएगा।
लाइसेंसिंग और दूरी का प्रस्ताव
तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों की लाइसेंसिंग व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही दो तंबाकू दुकानों के बीच कम से कम 500 मीटर की दूरी सुनिश्चित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इससे स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास तंबाकू की उपलब्धता कम करने में मदद मिलेगी।
सरकारी दफ्तर होंगे तंबाकू मुक्त
सभी सरकारी कार्यालयों को तंबाकू मुक्त घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे स्वयं भी नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। इससे कार्यस्थलों पर स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनेगा।
स्वस्थ प्रदेश की ओर कदम
इन निर्णयों से स्पष्ट है कि सरकार तंबाकू नियंत्रण को केवल कानून तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देना चाहती है। यदि सरकारी दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों में सख्ती से नियम लागू हुए, तो प्रदेश में तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
.png)
0 comments:
Post a Comment