रूस से तेल की घटती खेप
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने घरेलू जरूरतों के लिए सस्ते रूसी तेल की भारी खरीदारी की थी। उस समय रूस भारत के कुल आयात का लगभग 40% हिस्सा दे रहा था। अब इस हिस्सेदारी में गिरावट आई है। जनवरी 2026 में रूस से आयात लगभग 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, जो पिछले तीन साल में सबसे कम है। कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 21% के आसपास आ गई है।
सऊदी अरब की बढ़ती पकड़
रूस से दूरी बनाने के साथ ही भारत ने मध्य पूर्व के देशों से तेल की खरीद तेज़ कर दी है। सऊदी अरब ने फिर से भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता का स्थान हासिल किया है। सऊदी अरब से तेल की खरीद में भारी उछाल आया और यह 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई। जबकि अमेरिका से तेल की खरीद में भी 31% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
रूस का नया ग्राहक चीन
भारत द्वारा रूस से दूरी बनाने के बाद चीन ने इसका पूरा लाभ उठाया। अब चीन रूस से तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। फरवरी में चीन को रूस से रोजाना लगभग 2.07 मिलियन बैरल तेल मिल रहा है, जो जनवरी के 1.7 मिलियन बैरल के आंकड़े से अधिक है।

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