भारत-अमेरिका की जोरदार डील! चीन की आंखें खुली रह गई

न्यूज डेस्क। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एक अहम रणनीतिक समझौता सामने आया। भारत ने पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर कर इस बहुपक्षीय पहल में औपचारिक रूप से शामिल होने का निर्णय लिया। यह कदम सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

हस्ताक्षर के अवसर पर भारत में अमेरिकी राजदूत सेगियो गोर, अमेरिका के आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा और पर्यावरण मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद रहे। अमेरिकी पक्ष ने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते तकनीकी और आर्थिक सहयोग का प्रतीक बताया।

पैक्स सिलिका क्या है?

पैक्स सिलिका एक अमेरिकी नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल है, जिसकी शुरुआत 2025 के अंत में की गई थी। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और AI टेक्नोलॉजी के लिए सुरक्षित, विविध और नवाचार-आधारित सप्लाई चेन तैयार करना है। इस पहल के माध्यम से जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत के इस पहल में शामिल होने से उसे अमेरिकी गठबंधन की क्रिटिकल मिनरल्स, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और AI सप्लाई चेन तक व्यापक पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक तकनीकी नेटवर्क में शामिल होने और उन्नत विनिर्माण व अनुसंधान में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

व्यापक रणनीतिक संदर्भ

यह साझेदारी उस समय सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं की विश्वसनीयता और विविधीकरण पर जोर बढ़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा बुलाई गई क्रिटिकल मिनरल्स मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत की भागीदारी भी इसी दिशा का संकेत थी, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व एस. जयशंकर ने किया था।

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