1. आर्थिक वृद्धि में जबरदस्त उछाल
साल 2017-18 में यूपी की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 15 लाख करोड़ रुपये था, जो अब 2024-25 में लगभग दोगुना होकर 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। इसका मतलब है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियाँ लगातार तेज़ी से बढ़ रही हैं।
2. आम जनता की आमदनी दोगुनी
राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आठ साल पहले जहां यह करीब 67,000 रुपये थी, अब यह 1.26 लाख रुपये के करीब पहुँच चुकी है। इससे यह साफ है कि रोजगार के अवसर बढ़े हैं और आम नागरिक की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
3. लंबे समय के निवेश में बड़ा इजाफा
राज्य सरकार ने पूंजीगत खर्च पर विशेष ध्यान दिया। 2017-18 में यह लगभग 39,000 करोड़ रुपये था, जबकि 2025-26 में इसे बढ़ाकर 1.65 लाख करोड़ रुपये करने की योजना है। इस निवेश से सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार हुए हैं।
4. औद्योगिक विकास को नई रफ्तार
पिछले आठ साल में रजिस्टर्ड कारखानों की संख्या दोगुनी हो गई है। अब यूपी में 30,000 से अधिक कारखाने हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और राज्य में निवेश का माहौल भी सुधरा है।
5. बजट में निरंतर वृद्धि
यूपी का वार्षिक बजट भी लगातार बढ़ता रहा है। 2008 में बजट लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपये था, जो अब 2025-26 में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है। इससे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं को मजबूती मिलेगी।
6. टैक्स रेवेन्यू में बढ़ती हिस्सेदारी
राज्य का देश के कुल कर राजस्व में योगदान बढ़कर 53% तक पहुँचने की संभावना है। इसका मतलब है कि राज्य की अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत है और राजस्व संग्रह बढ़ने से विकास के और रास्ते खुलेंगे।
7. जीएसटी संग्रह में तेजी
उत्तर प्रदेश ने जीएसटी संग्रह में शानदार प्रदर्शन किया है। आठ साल पहले 59,000 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था, जो अब दोगुना होकर 1.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
8. निवेश और विकास का नया चेहरा
ये आंकड़े दिखाते हैं कि यूपी केवल कृषि पर निर्भर नहीं रहा। उद्योग, सेवा क्षेत्र और निवेश में राज्य ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अब यह प्रदेश भारत के विकास इंजन के रूप में उभर रहा है।

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