18% टैरिफ: भारत को मिला प्रतिस्पर्धात्मक लाभ
भारत के लिए तय 18% टैरिफ अन्य एशियाई देशों के मुकाबले कम है। चीन पर 37%, वियतनाम पर 20% और पाकिस्तान पर 19% टैरिफ लागू है। जबकि ब्राजील और म्यांमार जैसे देशों पर 40-50% टैरिफ है। इसका मतलब है कि भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में कई क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले सस्ती कीमत पर बिक सकते हैं।
किसानों और एमएसएमई की रक्षा
भारत ने समझौते में अपने किसानों और छोटे उद्योगों के हितों का विशेष ध्यान रखा है। प्रमुख कृषि उत्पाद जैसे गेहूं, चावल, डेयरी, मक्का, फल और सब्जियां लगभग सभी टैरिफ से बाहर रखी गई हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी बाजार खुलने पर किसानों को कोई नुकसान न हो और छोटे उद्योगों को भी वैश्विक अवसर मिलें।
केवल टैरिफ तक सीमित नहीं
यह समझौता सिर्फ टैरिफ के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए अमेरिका ने विभिन्न देशों को वरीयता दी है। उदाहरण के लिए, विकसित देशों पर टैरिफ 15% या उससे भी कम है, जबकि ब्राजील और चीन जैसे देश उच्च टैरिफ के तहत रखा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने उन देशों को प्राथमिकता दी है जो उसकी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों के अनुकूल हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
इस सौदे से भारत को केवल अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त नहीं मिली, बल्कि यह संकेत भी गया कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और आत्मनिर्भर हो रही है। यह कदम न सिर्फ व्यापार तक सीमित है बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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