PM मोदी ने दिखाई भारत की ताकत, अमेरिका सन्न, ट्रंप भी झुके!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया बातचीत में भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास के साथ दुनिया के बड़े देशों से व्यापार समझौते कर रहा है और किसी पर निर्भर नहीं है। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि बीते वर्षों में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों का परिणाम है।

38 देशों के साथ व्यापार समझौते

पीएम मोदी ने बताया की भारत ने अब तक 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मजबूत विनिर्माण क्षेत्र, तेजी से बढ़ता सेवा क्षेत्र और सशक्त एमएसएमई सेक्टर ने भारत को यह क्षमता दी है कि वह समान शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय समझौते कर सके।

राजनीतिक स्थिरता से बढ़ा भरोसा

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में स्थिर राजनीतिक माहौल और स्पष्ट नीतिगत दिशा ने विदेशी निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है। जब नीतियां पूर्वानुमानित और पारदर्शी होती हैं, तो निवेशक लंबी अवधि की योजनाएं बनाने में सहज महसूस करते हैं। उनका मानना है कि यही कारण है कि वैश्विक निवेशकों का रुझान भारत की ओर बढ़ा है।

बजट 2026-27: तैयारी और दृष्टि का दस्तावेज

प्रधानमंत्री ने हालिया बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह कोई तात्कालिक या दबाव में लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक तैयारी का हिस्सा है। उनके मुताबिक, यह बजट भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने इसे प्रेरणा देने वाला और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने वाला बजट बताया।

लोकलुभावन राजनीति से आगे निकला भारत

सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब फोकस अल्पकालिक लोकप्रिय घोषणाओं पर नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे और पूंजीगत व्यय पर है। उन्होंने बताया कि 2013 की तुलना में 2026-27 तक पूंजीगत व्यय में कई गुना वृद्धि की गई है, जो 12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इससे सड़क, रेल, रक्षा और अन्य बुनियादी परियोजनाओं को गति मिलेगी।

रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र पर जोर, एमएसएमई को वैश्विक बाजार

प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण को भी प्राथमिकता बताया। उनका कहना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है। रक्षा बजट में वृद्धि इसी दिशा का संकेत है। वहीं, एमएसएमई क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यापार समझौतों का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए बाजार खोलना है। वस्त्र, चमड़ा, रसायन, हस्तशिल्प और रत्न जैसे क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय अवसर देने से रोजगार और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी होगी।

प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की आर्थिक नीतियों पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पहले भारत मजबूत स्थिति में वार्ता नहीं कर पाता था। अब सुधारों के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता और स्थिर नीति ढांचे के कारण देश आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर आगे बढ़ रहा है।

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