किस तरह के हथियार होंगे शामिल?
इस डील में कई हाईटेक सिस्टम शामिल हैं:
1 .SPICE 1000 प्रिसिजन बम: यह मिसाइल ऑटोनॉमस तकनीक से लैस है और GPS पर निर्भर नहीं करती। 100 किलोमीटर तक की दूरी में लक्ष्यों को सटीक निशाना बनाने में सक्षम है।
2 .रैम्पेज मिसाइल: 150-250 किलोमीटर तक उड़ान भरने वाली यह मिसाइल सुखोई और मिग लड़ाकू विमानों पर तैनात की जा सकती है। यह दुश्मन के एयर डिफेंस को भेदकर लक्ष्यों पर सटीक हमले करने की क्षमता रखती है।
3 .एयर लोरा बैलिस्टिक मिसाइल: 400 किलोमीटर तक की रेंज वाली यह मिसाइल सुपरसोनिक गति से उड़ती है और "फायर एंड फॉरगेट" तकनीक से लैस है। लॉन्च के बाद इसे मार्गदर्शन की जरूरत नहीं होती।
4 .आइस ब्रेकर मिसाइल सिस्टम: यह मिसाइल 300 किलोमीटर तक जमीन और समुद्र पर लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। इसे सभी मौसम और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के माहौल में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सामरिक महत्व
इजरायल भारत का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है और यह डील दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी। आधुनिक हथियारों की मदद से भारत अब चीन और पाकिस्तान के खिलाफ अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ा सकता है। दो मोर्चों पर सुरक्षा बनाए रखने और बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने में सेना अब और सक्षम होगी।
भारत की बढ़ती ताकत
यह डील केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं है। इससे भारत की वैश्विक रक्षा छवि मजबूत होगी और पड़ोसी देशों के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारतीय सेना अब अत्याधुनिक हथियारों से लैस है। भविष्य में यह कदम देश की सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को प्रभावित करेगा।

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