यह जानकारी उन्होंने विधान परिषद सदस्य प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव द्वारा लाए गए गैर-सरकारी संकल्प के उत्तर में दी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस विषय पर जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पहले ही आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
पठन-पाठन को मिलेगी प्राथमिकता
शिक्षा मंत्री ने सदन में कहा कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है और सरकार इसमें किसी तरह की बाधा नहीं चाहती। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से आदेश जारी कर दिया गया था कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगाया जाए। इसके साथ ही विभाग ने सभी जिलों से उन शिक्षकों की सूची भी मांगी है, जिन्हें अभी भी किसी गैर-शैक्षणिक कार्य में लगाया गया है, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके।
कुछ आवश्यक कार्यों में रहेगा अपवाद
सरकार ने यह भी साफ किया कि जनगणना, चुनावी प्रक्रिया और आपदा के समय राहत एवं सहायता कार्यों में शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकती हैं, क्योंकि ये कार्य संवैधानिक और आपात प्रकृति के होते हैं। इन मामलों को छोड़कर किसी अन्य गतिविधि में शिक्षकों को तैनात नहीं किया जाएगा।
अखबारी रिपोर्ट से उठा था मामला
संकल्प पर चर्चा के दौरान प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव ने एक हिंदी समाचार पत्र में प्रकाशित उस लेख का हवाला दिया, जिसमें किसी राज्य में शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गणना जैसे कार्यों में लगाए जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने इस तरह की व्यवस्था से पठन-पाठन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की। सरकार के जवाब और आश्वासन से संतुष्ट होकर उन्होंने अपना गैर-सरकारी संकल्प वापस ले लिया।
शिक्षकों के सम्मान से समझौता नहीं
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में कहा कि शिक्षकों के मान-सम्मान और गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। यदि कहीं शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने की शिकायत है, तो वे सीधे विभाग को या संबंधित पोर्टल पर इसकी जानकारी दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से भी मामले की जानकारी उन्हें दी जा सकती है।

0 comments:
Post a Comment