अमेरिका ने भारत को दिया ऑफर, रूस को होगा नुकसान!

नई दिल्ली। अमेरिका ने हाल ही में भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत ने रूस से तेल आयात में कटौती करने की रणनीति अपनाई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका का उद्देश्य भारत को रूस की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है।

क्या है पूरी पृष्ठभूमि?

भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए। इस स्थिति में भारत रूस से तेल खरीदने वाला प्रमुख ग्राहक बन गया। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने रूस से तेल आयात करने को लेकर भारत पर 25% अतरिक्त टैरिफ लगा दिया था। अब अमेरिका ने रूस की जगह भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति दी हैं।

भारत और रूस पर असर

अमेरिका का यह कदम दोहरी रणनीति पर आधारित है। भारत को रूस पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करना और रूस की तेल से होने वाली आमदनी को घटाना, जिससे वह यूक्रेन युद्ध में संसाधन जुटाने में बाधित हो। रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत रूस से तेल की खरीद में कमी करेगा। अमेरिका ने इसके पहले रूस से तेल पर भारत पर टैरिफ बढ़ा दिया था, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ गया था।

भारत के लिए लाभ

इस नई अनुमति से भारत को निम्न लाभ होंगे: रूस से तेल पर निर्भरता कम होगी। वैश्विक तेल आपूर्ति में विविधता आएगी और कीमतों पर नियंत्रण बनेगा। वेनेजुएला से तेल खरीदने की सुविधा मिलने से रणनीतिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य

रूस से तेल की खरीद में कमी और वेनेजुएला से आयात बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में बदलाव आ सकता है। अमेरिका की यह नीति न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि रूस के आर्थिक दबाव को बढ़ाने की दिशा में भी असरदार कदम है।

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