यूपी सरकार का एक बड़ा फैसला, युवाओं के लिए खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट 2026-27 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को मजबूती देने के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। इस क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। राज्य की अर्थव्यवस्था में MSME की अहम भूमिका है, करीब 96 लाख इकाइयाँ तीन करोड़ से अधिक परिवारों की आजीविका से जुड़ी हैं। ऐसे में यह बजट सिर्फ धनराशि नहीं, बल्कि औद्योगिक ढांचे को अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ पर खास जोर

सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के तहत 1000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। लक्ष्य है कि हर साल एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित किए जाएं। यदि यह योजना तय रफ्तार से आगे बढ़ती है तो पांच वर्षों में पांच लाख से अधिक नई इकाइयाँ खड़ी हो सकती हैं। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी बनेंगे।

छोटे उद्यमियों को बिना जमानत ऋण की राह आसान

छोटे उद्यमियों को अक्सर बैंक ऋण के लिए जमानत की समस्या का सामना करना पड़ता है। बजट में ऋण गारंटी प्रणाली को मजबूत करने का प्रावधान इसी चुनौती को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार चाहती है कि नए और छोटे कारोबारी बिना बड़ी संपत्ति गिरवी रखे बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकें। इससे असंगठित क्षेत्र की इकाइयाँ औपचारिक अर्थव्यवस्था में आएंगी और पारदर्शिता के साथ उत्पादन तथा कर संग्रह में वृद्धि होगी।

क्लस्टर मॉडल और ODOP-ODOC को बढ़ावा

औद्योगिक विकास को गति देने के लिए क्लस्टर आधारित ढांचे पर भी जोर दिया गया है। ‘सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र’ के विकास हेतु 575 करोड़ रुपये का प्रावधान साझा मशीनरी, परीक्षण लैब और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में मदद करेगा। इसके साथ ही ‘एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)’ और ‘एक जनपद एक व्यंजन (ODOC)’ योजनाओं के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

स्वरोजगार से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर

‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के लिए 225 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस योजना का फोकस ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। साथ ही, एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक गलियारों और लॉजिस्टिक नेटवर्क के विस्तार से परिवहन लागत घटेगी, जिससे छोटे उद्यमों को निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिलेगा।

गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा पर जोर

यह बजट केवल इकाइयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकार उत्पादन क्षमता, तकनीकी उन्नयन और बाजार विस्तार पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है। यदि योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश का MSME क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत इंजन बन सकता है।

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