इस परियोजना की शुरुआत जमीन पर प्रस्तावित स्थानों की जांच से हो गई है। सोमवार से अलग-अलग जिलों में साइट सर्वे का काम शुरू किया गया। सर्वे के बाद यह तय किया जाएगा कि किन जगहों पर चार्जिंग स्टेशन बनाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से सबसे बेहतर रहेगा।
पहले चरण में 72 जगहों की जांच
परियोजना के तहत भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी BHEL की टीम ने साइट सर्वे शुरू किया है। शुरुआती चरण में पटना, गया, वैशाली, पूर्णिया, नालंदा और छपरा में चिन्हित 72 स्थानों का निरीक्षण किया जा रहा है। 17 से 20 अगस्त के बीच होने वाले इस सर्वे में कई जरूरी बिंदुओं की जांच होगी। इनमें जमीन की उपलब्धता, बिजली कनेक्शन की स्थिति, लोगों और वाहनों की पहुंच, जगह की उपयोगिता और अन्य तकनीकी जरूरतें शामिल हैं।
हाईवे और शहरों में मिलेगी प्राथमिकता
चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए ऐसी जगहों को प्राथमिकता देने की तैयारी है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों की आवाजाही ज्यादा रहती है। प्रमुख राजमार्गों के अलावा बड़े शहरी क्षेत्रों को भी योजना में खास महत्व दिया जा रहा है। इससे लंबी दूरी तय करने वाले ईवी चालकों को रास्ते में चार्जिंग की सुविधा मिलने की उम्मीद है। वहीं शहरों में इलेक्ट्रिक कार, ऑटो, बस और दूसरे वाहनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए भी चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होगा।
BHEL को मिली परियोजना की जिम्मेदारी
परियोजना को लेकर परिवहन विभाग और केंद्र सरकार से जुड़े अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई। बैठक में जिलों को सर्वे टीम को स्थानीय स्तर पर जरूरी सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं। भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक बिहार सरकार ने 129 स्थानों पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इस काम के लिए BHEL को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी दी गई है।

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