बिहार में इन 'शिक्षकों' के लिए बड़ी खुशखबरी, नए निर्देश जारी!

पटना। बिहार के नवस्थापित 211 डिग्री कॉलेजों में संविदा के आधार पर चयनित सहायक प्राध्यापकों के लिए राहत की खबर है। राजभवन ने इन शिक्षकों के शोध और नौकरी से जुड़े मामलों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पात्र शिक्षक संविदा प्राध्यापक के रूप में काम करते हुए अपनी पीएचडी पूरी कर सकेंगे। इससे उन अभ्यर्थियों को खास फायदा होगा, जो शोध कार्य और शिक्षण सेवा को एक साथ जारी रखना चाहते हैं।

नौकरी के साथ जारी रख सकेंगे शोध

नए निर्देशों के मुताबिक, चयनित शिक्षक यदि फेलोशिप छोड़कर संविदा प्राध्यापक के पद पर कार्यभार संभालते हैं, तो उन्हें अपना शोध बीच में रोकने की जरूरत नहीं होगी। राजभवन ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक बनने के बाद भी पात्र शोधार्थियों की पीएचडी की निरंतरता बनी रहे।

शोध पर्यवेक्षक का प्रमाण पत्र जरूरी

नौकरी के साथ शोध जारी रखने के लिए संबंधित अभ्यर्थी को अपने शोध पर्यवेक्षक यानी गाइड से प्रमाण पत्र लेना होगा। इस प्रमाण पत्र पर संबंधित विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे। प्रमाण पत्र में यह स्पष्ट किया जाएगा कि शोधार्थी ने अपने शोध से संबंधित आवश्यक प्रयोगशाला कार्य, फील्ड वर्क और डेटा संग्रह जैसे जरूरी हिस्से पर्याप्त रूप से पूरे कर लिए हैं। यदि शोध के इस चरण में नियमित रूप से शोध केंद्र पर मौजूद रहना आवश्यक नहीं है, तो शिक्षक अपनी नौकरी के साथ बाकी शोध कार्य पूरा कर सकेंगे।

गैर-फेलोशिप शोधार्थियों को भी राहत

जिन पंजीकृत शोधार्थियों को किसी प्रकार की फेलोशिप नहीं मिल रही है और उन्होंने अनिवार्य कोर्स वर्क पूरा कर लिया है, उन्हें भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। ऐसे अभ्यर्थी शिक्षण कार्य के बाद मिलने वाले समय, अवकाश या गैर-शैक्षणिक घंटों में अपने शेष शोध कार्य को पूरा कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय और शोध से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

दस्तावेज सत्यापन में भी मिली राहत

राजभवन के निर्देशों में दस्तावेज सत्यापन से जुड़े मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही गई है। यदि किसी अभ्यर्थी का निर्धारित तारीख पर दस्तावेज सत्यापन नहीं हो पाया है, तो केवल इसी वजह से उसकी नियुक्ति समाप्त नहीं की जाएगी। बाद में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जा सकता है। हालांकि, जांच में यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता या अन्य आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करता पाया जाता है, तो संबंधित साक्ष्यों के साथ मामले को बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के समक्ष रखा जाएगा।

पुराने संस्थान की जिम्मेदारियों के लिए अतिरिक्त समय

ऐसे चयनित अभ्यर्थी जो पहले किसी दूसरे संस्थान में कार्यरत थे और वहां की जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी बाकी हैं, उन्हें कार्यभार ग्रहण करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की व्यवस्था भी की गई है। राजभवन के इन निर्देशों से नए डिग्री कॉलेजों में नियुक्त होने वाले शिक्षकों को नौकरी और उच्च शिक्षा के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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