बैठक में खास तौर पर संस्कृत और मदरसा शिक्षकों के सात महीने से लंबित वेतन के भुगतान का मुद्दा उठा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 5 सितंबर से पहले भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए तेजी से काम किया जाए। इससे लंबे समय से बकाया वेतन की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
5 सितंबर के बाद बदल जाएगा आवेदन का तरीका
शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में आवेदन करने वाले शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि 5 सितंबर के बाद ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके बाद शिक्षकों को अपनी शिकायत या संबंधित आवेदन ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से ही जमा करना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल बनाना और मामलों के निपटारे में तेजी लाना है।
संस्कृत स्कूलों में होंगे बड़े बदलाव
शिक्षा विभाग संस्कृत शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है। अररिया, सारण, मधुबनी और भागलपुर के राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालयों समेत उन स्कूलों में समेकित विद्यालय विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई, जहां पर्याप्त जमीन उपलब्ध है।
इन संस्थानों में संस्कृत की पढ़ाई जारी रखने की बात कही गई है। वहीं, जिन स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण है, उसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। संस्कृत शिक्षा के विकास के लिए विशेषज्ञों और विद्वानों को शामिल करते हुए एक समिति गठित करने की भी तैयारी है।

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