केंद्र सरकार का बड़ा कदम, गांव के बुनकरों के लिए बड़ी खुशखबरी, बढ़ेगी कमाई

लखनऊ। केंद्र सरकार ने गांवों में काम करने वाले बुनकरों की आमदनी बढ़ाने और हथकरघा उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की दिशा में नई पहल पर जोर दिया है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर बुनकर सालाना कम से कम 5 लाख रुपये की आय हासिल कर सके।

ई-कॉमर्स से देश-दुनिया तक पहुंचेंगे उत्पाद

सरकार बुनकरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर काम कर रही है। इससे गांवों में तैयार होने वाले हथकरघा उत्पादों को नए ग्राहक मिल सकेंगे और बुनकरों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

मंत्री ने कहा कि हथकरघा सिर्फ कपड़े बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह भारत की कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत से जुड़ा हुआ है। कम कार्बन फुटप्रिंट के कारण टिकाऊ फैशन और होम डेकोर के क्षेत्र में भी इसकी संभावनाएं बढ़ रही हैं।

नई तकनीक और डिजाइन पर जोर

पारंपरिक बुनाई को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने के लिए नए डिजाइन और तकनीक पर काम किया जा रहा है। इसके लिए IIT दिल्ली जैसे संस्थानों के साथ सहयोग किया जा रहा है। उद्देश्य भारतीय हथकरघा और शिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।

23 अगस्त तक चलेगी प्रदर्शनी

दिल्ली के हैंडलूम हाट में ‘वीव द फ्यूचर 5.0’ प्रदर्शनी आयोजित की गई है। इसमें देशभर के 30 से अधिक ब्रांड और 24 प्रमुख बुनकर हिस्सा ले रहे हैं। यहां ऊन, रेशम, बांस, केला, भांग, अनानास और कमल जैसे प्राकृतिक रेशों से तैयार उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।

प्रदर्शनी में पारंपरिक बुनाई के साथ आधुनिक डिजाइन का मेल देखने को मिल रहा है। यह आयोजन 23 अगस्त तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। सरकार की कोशिश है कि ऐसे आयोजनों और डिजिटल बाजार के जरिए गांवों के बुनकरों को बेहतर बाजार और ज्यादा आमदनी का अवसर मिले।

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