लगातार बढ़ रहा यूपी का केंद्रीय बिजली हिस्सा
आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से मिलने वाली बिजली में पिछले कुछ समय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 31 मार्च 2025 तक प्रदेश के हिस्से में 9,530.4 मेगावाट बिजली थी। यह आंकड़ा 31 मार्च 2026 को बढ़कर 10,881.2 मेगावाट हो गया। इसके बाद 30 जून 2026 तक केंद्रीय परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश के लिए आवंटन बढ़कर 11,520.5 मेगावाट पहुंच गया। यानी करीब डेढ़ साल के दौरान केंद्रीय हिस्से से मिलने वाली बिजली में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।
महाराष्ट्र से भी आगे निकला उत्तर प्रदेश
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 को उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से महाराष्ट्र की तुलना में 2,495.3 मेगावाट अधिक बिजली मिली। इससे केंद्रीय बिजली आवंटन में उत्तर प्रदेश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केंद्रीय क्षेत्र से अधिक बिजली मिलने से प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
2008 में उठी थी बिजली आवंटन की मांग
उत्तर प्रदेश को केंद्रीय बिजली आवंटन में अधिक हिस्सा दिए जाने की मांग कोई नई नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2008 में ‘गाडगिल फार्मूले’ के आधार पर प्रदेश को बिजली आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाया था। परिषद की ओर से रखे गए तर्क के आधार पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ने भी केंद्र सरकार के सामने इस व्यवस्था के तहत बिजली आवंटन की मांग रखी थी। अब परिषद का कहना है कि लंबे समय से उठाए जा रहे इस मुद्दे का लाभ प्रदेश को मिलता दिखाई दे रहा है।
गाडगिल फार्मूले में जनसंख्या को अहम महत्व
बिजली आवंटन से जुड़े इस फार्मूले में कई मानकों को ध्यान में रखा जाता है। इनमें सबसे बड़ा भारांक जनसंख्या का है। कुल भारांक में करीब 60 प्रतिशत हिस्सा जनसंख्या से जुड़ा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय, सिंचाई और बिजली से संबंधित चल रही परियोजनाएं, राज्यों की विशेष परिस्थितियां और कर प्रयास जैसे मानकों को भी महत्व दिया जाता है। राज्यों की पिछले कुछ वर्षों की ऊर्जा खपत भी बिजली आवंटन तय करने में भूमिका निभाती है।

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