अदालत के इस आदेश के बाद जिन शिक्षकों के तबादले सरप्लस के आधार पर किए जाने थे, उनकी प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगी। जिन शिक्षकों को संभावित स्थानांतरण को लेकर चिंता थी, उन्हें इस आदेश से तत्काल राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने फिलहाल मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने का निर्देश दिया है। ऐसे में शिक्षक अगले आदेश तक उसी स्कूल में अपनी सेवाएं देते रहेंगे, जहां वे अभी तैनात हैं। यानी शिक्षा विभाग की ओर से सरप्लस के आधार पर किए जा रहे या प्रस्तावित स्थानांतरण पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। आगे की कार्रवाई अदालत के अगले निर्देश के बाद ही स्पष्ट होगी।
तबादले की प्रक्रिया पर क्यों उठे सवाल?
सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से अदालत में ट्रांसफर प्रक्रिया से जुड़ी कई आपत्तियां रखी गईं। शिक्षकों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सरप्लस की पहचान और उसके आधार पर तबादले की प्रक्रिया में कथित तौर पर कई विसंगतियां सामने आई हैं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह भी कहा गया कि इस प्रक्रिया से शिक्षकों के सामने प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर कई परेशानियां खड़ी हो रही थीं। इन दलीलों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
हजारों शिक्षकों को मिली तत्काल राहत
इस आदेश का असर उन शिक्षकों पर पड़ेगा जो सरप्लस सूची में शामिल होने या तबादले की आशंका को लेकर परेशान थे। फिलहाल उन्हें अपनी वर्तमान तैनाती वाले विद्यालय में ही काम करना होगा। शिक्षा विभाग के लिए भी अब अगला कदम अदालत की कार्यवाही से जुड़ा रहेगा। यानी जब तक मामले में आगे कोई स्पष्ट आदेश नहीं आता, तब तक सरप्लस शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

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