1. युवाओं को जोड़ा जाएगा गो सेवा से
अभियान के तहत मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे गांवों में लोगों को जागरूक करेंगे। बच्चों और युवाओं को देसी गोवंश, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और गो आधारित उत्पादों के फायदे बताए जाएंगे। सरकार का जोर गो सेवा को नई पीढ़ी के लिए रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है।
2. गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश
प्रदेश में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। सरकार ने प्रति गोवंश सहायता राशि को 30 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन किया है। कई आश्रय स्थलों में निगरानी के लिए सीसीटीवी की व्यवस्था भी की गई है।
3. पशुपालकों को मिलेगा रोजगार का सहारा
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के जरिए करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। सरकार का उद्देश्य पशुपालन को ग्रामीण परिवारों की नियमित आय का जरिया बनाना है।
4. गोबर से तैयार होंगे कमाई वाले उत्पाद
गोशालाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकंपोस्ट, धूपबत्ती, गमले और दीये जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन कामों में महिला स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
5. जिले के हिसाब से बनेगी रोजगार की योजना
हर जिले की क्षमता के अनुसार गोशालाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। जहां बायोगैस की संभावना अधिक होगी, वहां प्लांट लगाने पर जोर दिया जाएगा। अन्य जगहों पर जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जा सकती हैं। इससे गो संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की कोशिश होगी।

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