बताया गया कि प्रस्तावित पार्क के लिए चिन्हित जमीन का बड़ा हिस्सा फिलहाल परती पड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों और भू-स्वामियों की ओर से भी परियोजना को लेकर सकारात्मक रुख है। हालांकि कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिलने के कारण आगे की प्रक्रिया अभी अटकी हुई है।
युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
औद्योगिक पार्क बनने के बाद बरहगामा, ढेकवाहा और आसपास के कई गांवों के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की उम्मीद है। यहां उद्योग स्थापित होने पर कुशल, अर्धकुशल और सामान्य श्रमिकों की जरूरत होगी। इससे युवाओं को नौकरी के लिए पटना, गया और दूसरे बड़े शहरों की ओर पलायन कम करना पड़ सकता है।
पार्क के निर्माण के दौरान भी मजदूरों और अन्य कामगारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा होटल, ढाबा, किराना, वाहन मरम्मत, परिवहन और माल ढुलाई जैसे छोटे कारोबारों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
किसानों को भी मिल सकता है फायदा
अगर पार्क में कृषि आधारित उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होती हैं, तो आसपास के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय बाजार मिल सकता है। इससे भंडारण और प्रसंस्करण की सुविधाएं बढ़ने के साथ कृषि उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है।
औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने पर सड़क, बिजली, पानी और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि 564 एकड़ की इस प्रस्तावित परियोजना को कैबिनेट से मंजूरी कब मिलती है।

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