8th CPC: केंद्रीय कर्मचारियों की 'बुलेट ट्रेन' की रफ्तार से बढ़ेगी सैलरी

नई दिल्ली। 8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच हलचल बढ़ गई है। अब तक जहां 15 या 20 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी की चर्चा होती रही है, वहीं कर्मचारियों के संगठनों की ओर से पे-लेवल मर्जर का प्रस्ताव चर्चा में है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो निचले पे-लेवल के कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य बढ़ोतरी की तुलना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

6 पे-लेवल को 3 में मिलाने का प्रस्ताव

कर्मचारी संगठनों की मांग है कि मौजूदा Level-1 से Level-6 को मिलाकर तीन बड़े पे-लेवल बनाए जाएं। प्रस्ताव के मुताबिक Level-1 और Level-2 को एक, Level-3 और Level-4 को दूसरे तथा Level-5 और Level-6 को तीसरे स्तर में रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य वेतन में अंतर कम करने के साथ कर्मचारियों को जल्दी आगे बढ़ने का अवसर देना है।

फिटमेंट फैक्टर से कितना बढ़ सकता है वेतन?

यदि उदाहरण के तौर पर 1.92 फिटमेंट फैक्टर और प्रस्तावित मर्जर को आधार बनाया जाए, तो Level-1 की मौजूदा ₹18,000 बेसिक सैलरी मर्जर के बाद ₹19,900 के आधार पर तय होकर करीब ₹38,208 हो सकती है।

इसी तरह Level-3 की ₹21,700 बेसिक सैलरी मर्जर के बाद ₹25,500 के आधार पर करीब ₹48,960 और Level-5 की ₹29,200 बेसिक सैलरी ₹35,400 के आधार पर करीब ₹67,968 तक पहुंच सकती है। हालांकि, ये आंकड़े संभावित फिटमेंट फैक्टर और पे-लेवल मर्जर की गणना पर आधारित हैं। इनमें DA, HRA और दूसरे भत्ते शामिल नहीं हैं।

प्रमोशन की रफ्तार भी बढ़ने की उम्मीद

पे-लेवल कम होने से कर्मचारियों के करियर में प्रमोशन की सीढ़ियां भी छोटी हो सकती हैं। मौजूदा व्यवस्था में निचले स्तर से ऊपर पहुंचने में लंबा समय लग सकता है। मर्जर लागू होने पर कम स्तरों के कारण कर्मचारियों को अपेक्षाकृत तेजी से अगले वेतन स्तर तक पहुंचने का मौका मिल सकता है।

इससे सैलरी के साथ पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी भविष्य में सकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम वेतन कितना बढ़ेगा और पे-लेवल मर्जर लागू होगा या नहीं, इसका फैसला 8वें वेतन आयोग और सरकार के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

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