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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, देशभर के छात्रों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देशभर के कृषि छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। कृषि की पढ़ाई और रिसर्च कर रहे विद्यार्थियों को अब स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था से जोड़कर नई डिजिटल प्रणाली शुरू की है।

इस व्यवस्था की शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा परिसर से की। नई प्रणाली के तहत पहली किस्त के रूप में 21.35 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे देशभर के 6000 से अधिक कृषि छात्रों को सीधे आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।

सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी स्कॉलरशिप

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्कॉलरशिप और फेलोशिप की रकम सीधे पात्र छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। NSP और DBT के एकीकरण से भुगतान की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक डिजिटल और व्यवस्थित होगी। सरकार की योजना के अनुसार पात्र विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता समय पर मिल सकेगी। इससे छात्रों को अपनी पढ़ाई, रिसर्च, प्रोजेक्ट और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के खर्च को संभालने में आसानी होगी।

रिसर्च करने वाले छात्रों को भी फायदा

कृषि क्षेत्र में पोस्टग्रेजुएट और रिसर्च कर रहे विद्यार्थियों के लिए फेलोशिप काफी महत्वपूर्ण होती है। समय पर राशि मिलने से उन्हें रिसर्च से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी और आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई या शोध प्रभावित होने की संभावना भी कम होगी।

सरकार का जोर कृषि शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय छात्रों को खेती और किसानों की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने पर भी है। विद्यार्थियों को फील्ड विजिट, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और जमीनी अनुभव देने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वे किसानों के लिए उपयोगी तकनीक और समाधान विकसित कर सकें।

कृषि शिक्षा को मजबूत करने की तैयारी

केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि की पढ़ाई में वैज्ञानिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी जरूरी है। छात्रों को खेतों, मिट्टी और किसानों की समस्याओं को करीब से समझना चाहिए, ताकि उनकी रिसर्च का सीधा लाभ कृषि क्षेत्र को मिल सके।

सरकार की इस डिजिटल पहल से कृषि छात्रों को आर्थिक सहायता मिलने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। साथ ही समय पर स्कॉलरशिप और फेलोशिप मिलने से विद्यार्थियों का ध्यान आर्थिक परेशानियों के बजाय अपनी पढ़ाई और रिसर्च पर केंद्रित रह सकेगा।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने संसद में बताया कब लागू होगा नया वेतन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और नई सैलरी का इंतजार है। इसी बीच सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि आयोग ने अभी तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। तय समय के मुताबिक आयोग की अंतिम रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है। हालांकि, जरूरत के अनुसार आयोग किसी विषय पर पहले भी अंतरिम रिपोर्ट दे सकता है।

अभी लागू होने की तारीख तय नहीं

सरकार ने साफ किया है कि 8वें वेतन आयोग के नए वेतनमान को लागू करने की कोई आधिकारिक प्रभावी तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में कर्मचारियों को नई सैलरी कब से मिलेगी, इसे लेकर फिलहाल अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। वेतन आयोग के दायरे में कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा शामिल है। आयोग की सिफारिशें आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही नई व्यवस्था लागू होने का रास्ता साफ होगा।

लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक करीब 35.77 लाख केंद्रीय सिविलियन कर्मचारी कार्यरत थे। वहीं दिसंबर 2025 तक लगभग 33.76 लाख पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी दर्ज किए गए थे। रक्षा पेंशनभोगी इस आंकड़े में शामिल नहीं हैं। इसलिए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है। वेतन के साथ भत्तों और पेंशन में संभावित बदलाव पर भी सभी की नजर बनी हुई है।

कर्मचारी संगठनों ने रखीं अपनी मांगें

वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों और शहरों में कर्मचारी संगठनों से बातचीत कर रहा है। कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने वेतन, पेंशन और भत्तों को लेकर अपनी मांगें आयोग के सामने रखी हैं। रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षकों के संगठन की ओर से न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाने, 2.92 फिटमेंट फैक्टर और सालाना 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि जैसी मांगें भी रखी गई हैं। हालांकि ये कर्मचारियों की मांगें हैं और इन्हें आयोग की अंतिम सिफारिश नहीं माना जा सकता।

केंद्र सरकार की बड़ी घोषणा, इस शहर को लेकर आई खुशखबरी

नई दिल्ली। मुंबई लोकल से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने मुंबई की लोकल सेवा में 238 नई एसी ट्रेनों को शामिल करने की मंजूरी दे दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि नई व्यवस्था के तहत ट्रेनों का निर्माण तेजी से किया जाएगा, ताकि 2027 तक पहली नई एसी लोकल यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई जा सके।

2027 से दिखेगा बड़ा बदलाव

रेल मंत्री के मुताबिक मुंबई की लोकल ट्रेनें शहर की लाइफलाइन हैं। नई एसी लोकल ट्रेनों को शामिल करने का फैसला यात्रियों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए लिया गया है। पहले जिस प्रक्रिया के जरिए ट्रेनों का निर्माण होना था, उसमें काफी समय लगने की संभावना थी और पूरी प्रक्रिया 2030 तक खिंच सकती थी।

ICF, RCF और MCF में होगा निर्माण

नई एसी लोकल ट्रेनों के उत्पादन में भारतीय रेलवे की प्रमुख कोच फैक्ट्रियों को शामिल किया जाएगा। इनमें इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), रेल कोच फैक्ट्री (RCF) और मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि उत्पादन प्रक्रिया को तेज कर जल्द से जल्द पहली नई एसी लोकल मुंबई में उतारी जा सके।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

मुंबई में रोजाना बड़ी संख्या में लोग लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। ऐसे में 238 नई एसी लोकल आने से यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। भीड़ को कम करने के साथ गर्मी और उमस के दौरान एसी ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मुंबई में सीमित संख्या में एसी लोकल सेवाएं संचालित होती हैं और इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। नई ट्रेनों के शामिल होने से लोकल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार की बड़ी सौगात, बिहारवासियों के लिए 2 नई खुशखबरी

पटना। बिहार के मिथिला क्षेत्र के युवाओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। पीएम सेतु योजना के तहत दरभंगा के रामनगर आईटीआई और बेनीपुर सरकारी आईटीआई को आधुनिक संस्थान के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी गई है। दोनों संस्थानों के विकास पर कुल 241 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

रामनगर बनेगा हब, बेनीपुर को मिलेगा स्पोक का दर्जा

योजना के तहत रामनगर आईटीआई को हब संस्थान और बेनीपुर आईटीआई को स्पोक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। रामनगर को मिथिला में कौशल प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के तौर पर तैयार किया जाएगा, जबकि बेनीपुर संस्थान इससे जुड़कर प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों का लाभ उठाएगा।

आधुनिक लैब और तकनीकी सुविधाएं

दोनों आईटीआई में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक लैब और नई तकनीक से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संस्थानों के विकास और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। इससे छात्रों को पारंपरिक प्रशिक्षण के साथ नई तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान भी मिल सकेगा।

युवाओं को मिलेगा रोजगार का मौका

मिथिला के बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा मिलने से उन्हें अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए विकल्प मिल सकते हैं। योजना का उद्देश्य युवाओं को ऐसी स्किल देना है, जिसकी मांग उद्योगों में है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद विद्यार्थियों के लिए नौकरी के साथ अपना काम शुरू करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

जल्द शुरू होंगे विकास कार्य

स्वीकृति मिलने के बाद दोनों संस्थानों में विकास कार्य शुरू करने की तैयारी है। आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बाद रामनगर और बेनीपुर आईटीआई मिथिला के युवाओं को बेहतर तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कल बनेगा शिव योग, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत! रुके काम होंगे पूरे

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में कुछ योगों को बेहद शुभ माना गया है। इन्हीं में से एक शिव योग है। पंचांग के अनुसार कल सुबह 9:27 बजे के बाद शिव योग का निर्माण होगा, जो अगले दिन सुबह 7:07 बजे तक रहेगा। इस दौरान धार्मिक, आध्यात्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए समय अनुकूल माना जाता है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए शिव योग सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। नौकरी और कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से अटका कोई काम आगे बढ़ सकता है। आर्थिक मामलों में भी राहत मिलने की संभावना है। परिवार में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल बन सकता है।

सिंह राशि

शिव योग सिंह राशि वालों के लिए भी लाभकारी रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है और जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार करने वालों को किसी महत्वपूर्ण सौदे से फायदा मिल सकता है। धन से जुड़े मामलों में स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों को शिव योग के दौरान रुके हुए कार्यों में सफलता मिल सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। कारोबार में नए संपर्क भविष्य में लाभ पहुंचा सकते हैं। परिवार और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा, जिससे कई जरूरी फैसले लेने में आसानी होगी।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के लिए भी यह योग शुभ परिणाम देने वाला माना जा सकता है। आर्थिक परेशानियों में कुछ कमी आ सकती है और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी का अवसर मिल सकता है। लंबे समय से अधूरी योजना को पूरा करने के लिए समय अनुकूल रहेगा।

ब्रेन की नस फटने के 5 बड़े संकेत! शरीर में दिखें ये लक्षण तो तुरंत रहें सावधान

हेल्थ डेस्क। ब्रेन की नस फटना, जिसे आमतौर पर ब्रेन हेमरेज कहा जाता है, एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका से खून निकलने लगता है, जिससे दिमाग के आसपास या उसके भीतर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। कुछ लक्षण अचानक सामने आते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

1. अचानक बेहद तेज सिरदर्द

बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना ब्रेन हेमरेज का महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है। खासकर अगर दर्द असामान्य रूप से तेज हो और अचानक शुरू हुआ हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

2. बोलने या समझने में परेशानी

अचानक बोलने में दिक्कत, शब्दों का सही उच्चारण न कर पाना, बात समझने में परेशानी या व्यक्ति का भ्रमित होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में देरी करना खतरनाक हो सकता है।

3. शरीर के एक हिस्से में कमजोरी

चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, खासकर शरीर के एक तरफ, स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज से जुड़ा संकेत हो सकता है। चेहरे का एक तरफ झुकना भी ध्यान देने योग्य लक्षण है।

4. देखने या चलने में परेशानी

अचानक धुंधला या दोहरा दिखाई देना, संतुलन बिगड़ना, चलने में परेशानी या तेज चक्कर आना भी मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

5. बेहोशी या दौरा पड़ना

अचानक बेहोशी, चेतना में बदलाव या दौरा पड़ना भी ब्रेन हेमरेज की स्थिति में दिखाई दे सकता है। ऐसे लक्षण आने पर मरीज को घर पर इंतजार कराने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

लक्षण दिखें तो क्या करें?

ब्रेन हेमरेज के लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं और तेजी से गंभीर हो सकते हैं। इसलिए तेज सिरदर्द, चेहरे का टेढ़ा होना, एक तरफ कमजोरी, बोलने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें।

LPG सिलेंडर को लेकर बड़ा अपडेट, सभी के लिए जानना जरूरी

नई दिल्ली। एलपीजी गैस उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर है। अगर आपको गैस कनेक्शन की e-KYC कराने का मैसेज या फोन आया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। तेल कंपनियां ऐसे ग्राहकों को आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करने के लिए याद दिला रही हैं। बताया गया है कि 16 अगस्त 2026 तक e-KYC पूरा करने की समयसीमा दी गई है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य घरेलू एलपीजी कनेक्शनों का सत्यापन करना और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह प्रक्रिया केवल उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं पर भी लागू हो सकती है।

e-KYC नहीं कराया तो क्या होगा?

तय समय तक सत्यापन पूरा नहीं करने वाले ग्राहकों को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर लेने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि गैस कनेक्शन तुरंत रद्द हो जाएगा। e-KYC पूरा होने तक घरेलू दर पर सिलेंडर मिलने की पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से उपभोक्ताओं को समय रहते अपना आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करने की सलाह दी जा रही है।

घर बैठे भी पूरी हो सकती है प्रक्रिया

इंडेन के ग्राहक IndianOil ONE ऐप के जरिए e-KYC प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके लिए एलपीजी खाते की जानकारी जोड़ने के बाद संबंधित KYC विकल्प पर जाकर आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन किया जा सकता है। इसके अलावा ग्राहक अपनी गैस एजेंसी या सिलेंडर की डिलीवरी के दौरान डिलीवरी कर्मचारी की मदद से भी सत्यापन करा सकते हैं।

भारत गैस के उपभोक्ता Hello BPCL ऐप के माध्यम से e-KYC विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं HP गैस ग्राहक HP Pay ऐप और आधार फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा के जरिए प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। e-KYC के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि एलपीजी कनेक्शन सही उपभोक्ता के नाम पर हो और घरेलू गैस की सुविधा वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। इससे फर्जी कनेक्शन, गैस के दुरुपयोग और वितरण व्यवस्था में अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

यूपी सरकार का बड़ा तोहफा, सभी बहनों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। रक्षाबंधन के मौके पर उत्तर प्रदेश की बहनों और यात्रियों के लिए योगी सरकार ने बड़ी तैयारी की है। त्योहार के दौरान घर जाने वाले लोगों को बसों की कमी और लंबी प्रतीक्षा से परेशानी न हो, इसके लिए 26 से 31 अगस्त तक छह दिनों के लिए अतिरिक्त बसें चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

परिवहन विभाग के मुताबिक त्योहार के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रमुख मार्गों पर बसों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों की सुविधा पर विशेष ध्यान रहेगा। लखनऊ, कानपुर और अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी मांग के अनुसार अतिरिक्त बसें संचालित की जाएंगी।

बस अड्डों पर मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

सरकार ने बसों की संख्या बढ़ाने के साथ यात्रियों की सुविधाओं को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। बस स्टेशनों पर साफ-सफाई, पीने के पानी, पर्याप्त रोशनी और प्रतीक्षालयों में पंखों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। यात्रियों को बसों के संचालन और उपलब्धता की जानकारी देने के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। भीड़ वाले बस अड्डों पर अधिकारी और पर्यवेक्षक मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।

दिल्ली से पूर्वांचल तक बढ़ेगी बस सेवा

त्योहार के दौरान यात्रियों की मांग के अनुसार दिल्ली से मुरादाबाद-बरेली होते हुए पूर्वी यूपी और दिल्ली से अलीगढ़-कानपुर होकर पूर्वांचल की ओर जाने वाली बस सेवाओं को बढ़ाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य प्रमुख रूटों पर यात्रियों को आसानी से बस उपलब्ध कराना है।

परिवहन कर्मचारियों को भी मिलेगा प्रोत्साहन

रक्षाबंधन के दौरान लगातार सेवा देने वाले चालक, परिचालक और तकनीकी कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है। तय शर्तें पूरी करने वाले पात्र चालक-परिचालकों को छह दिनों में 1800 किलोमीटर बस संचालन पर 1200 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

वहीं निर्धारित अवधि में डिपो और क्षेत्रीय कार्यशाला में उपस्थित रहने वाले पात्र तकनीकी कर्मचारियों को 500 रुपये एकमुश्त प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि त्योहार के दौरान यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक परिवहन सेवा मिल सके।

सम्राट कैबिनेट के 10 बड़े फैसले, बिहारवासियों के लिए आई खुशखबरी

पटना। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में कुल 10 फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें कुशल युवा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने, निजी आईटीआई में संयुक्त प्रवेश और निजी बीएड संस्थानों को बहुविषयक कॉलेज के रूप में विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।

पांच साल और चलेगा कुशल युवा कार्यक्रम

सरकार ने कुशल युवा कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए 2026-27 में करीब 430.08 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करना है।

AI, ड्रोन और डिजिटल क्षेत्र में प्रशिक्षण

समय के साथ रोजगार के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रशिक्षण में नए क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सोलर, नेटवर्किंग, डिजिटल मार्केटिंग और वेब टेक्नोलॉजी के साथ होम नर्सिंग और मेडिकल से जुड़े कौशल भी सिखाए जाएंगे। सरकार की योजना के मुताबिक करीब 6,436 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से हर साल लगभग 2.57 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है।

निजी बीएड कॉलेजों को नए विकल्प

एकल निजी बीएड संस्थानों को बहुविषयक डिग्री कॉलेज के रूप में विकसित करने का रास्ता भी साफ किया गया है। पात्र संस्थानों में बीएड के अलावा कला, विज्ञान और वाणिज्य जैसे स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय, यूजीसी, एनसीटीई और राज्य सरकार के नियमों का पालन करना होगा।

निजी ITI में प्रवेश व्यवस्था बदलेगी

कैबिनेट ने निजी आईटीआई में दाखिले को लेकर भी अहम फैसला लिया है। निजी संस्थानों की 50 प्रतिशत सीटों पर संयुक्त प्रवेश प्रक्रिया के जरिए नामांकन कराने का प्रावधान किया गया है। इससे प्रवेश प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

युवाओं और छात्रों पर फोकस

कैबिनेट के फैसलों से साफ है कि सरकार का जोर युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने पर है। आधुनिक कौशल प्रशिक्षण से युवाओं को नौकरी के साथ अपना काम शुरू करने का अवसर भी मिल सकता है। वहीं बहुविषयक कॉलेजों के विस्तार से विद्यार्थियों को अपने आसपास ही उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है।

बिहार के स्कूलों में शिक्षकों का होगा ‘रोटेशन’ जानें पूरी डिटेल्स!

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से एक ही विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है। शिक्षा विभाग की प्रस्तावित सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया में पांच साल या उससे अधिक समय से एक ही स्कूल में पदस्थापित शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जा सकता है। इससे ऐसे शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ी है।

लंबे समय से तैनात शिक्षकों पर नजर

बताया जा रहा है कि निर्धारित श्रेणी में आने वाले शिक्षकों के लिए स्थानांतरण प्रक्रिया में आवेदन करना जरूरी किया जा सकता है। यदि कोई पात्र शिक्षक आवेदन नहीं करता है तो विभागीय स्तर से उसका स्थानांतरण किए जाने की संभावना भी है। हालांकि, अंतिम प्रक्रिया विभागीय नियम और गठित कमेटी के निर्णय के आधार पर तय होगी।

सरप्लस शिक्षकों को भी किया जा सकता है शिफ्ट

शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करना है। जिन विद्यालयों में जरूरत से अधिक शिक्षक हैं, वहां से सरप्लस शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजा जा सकता है जहां किसी विषय के शिक्षकों की कमी है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विषयवार शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें।

सिर्फ कुल संख्या से नहीं तय हो जरूरत

शिक्षकों का कहना है कि किसी स्कूल में शिक्षकों की जरूरत का आकलन केवल छात्र और शिक्षक की कुल संख्या देखकर नहीं किया जाना चाहिए। कई विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक पर्याप्त हैं, जबकि छठी से आठवीं तक हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

स्पष्ट नियम की मांग

स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों के बीच आवेदन और नियमों को लेकर असमंजस भी है। शिक्षक चाहते हैं कि विभाग स्थानांतरण की पूरी नीति, पात्रता और प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करे। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से कहा गया है कि शिक्षकों का स्थानांतरण विभागीय नियमों के अनुसार ही होगा और इस संबंध में गठित कमेटी निर्णय लेगी। अगर यह प्रक्रिया लागू होती है तो इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों का समान वितरण और विषयवार कमी को दूर करना होगा, ताकि जरूरत वाले विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हो सकें।

बिहार सरकार की बड़ी तैयारी, जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी!

पटना। बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को व्यवस्थित और डिजिटल बनाने के लिए चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने पांच जिलों में चल रहे सर्वे कार्य की समीक्षा की। शिवहर, अरवल, जहानाबाद, लखीसराय और शेखपुरा में सर्वे का काम अब अंतिम चरण में बताया गया है।

जल्द दूसरे जिलों में भी बढ़ेगी रफ्तार

समीक्षा के दौरान अधिकारियों को सर्वे प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इन पांच जिलों में काम पूरा होने के बाद अगले चरण के जिलों का चयन कर वहां सर्वेक्षण को गति देने की तैयारी है। सरकार ने पूरे विशेष भूमि सर्वेक्षण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?

सर्वे पूरा होने के बाद जमीन से जुड़े नक्शे, खतियान और अधिकार अभिलेख डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी और फर्जीवाड़े, अवैध कब्जे तथा एक ही जमीन की कई बार बिक्री जैसे विवादों पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी। दाखिल-खारिज और पारिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है।

रैयतों को नहीं देना होगा कोई शुल्क

विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया सरकार की ओर से पूरी तरह निशुल्क रखी गई है। जमीन मालिकों को अमीन, कानूनगो या शिविर प्रभारी को इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना है। सर्वे के दौरान अमीन मौके पर पहुंचकर जमीन की सीमाओं की जांच करेंगे और आधुनिक उपकरणों की मदद से प्लॉट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

यूपी में महिलाओं के लिए बंपर भर्ती, 12वीं पास के लिए खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। महराजगंज जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और सहायिका के 305 पदों पर भर्ती निकाली गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इच्छुक और योग्य महिला उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।

1 सितंबर तक कर सकेंगी आवेदन

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 1 सितंबर 2026 की रात 12 बजे तक आवेदन कर सकती हैं। आवेदन निर्धारित ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

सिर्फ महिलाओं को मिलेगा मौका

भर्ती में केवल महिला अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकती हैं। उम्मीदवार का संबंधित ग्राम सभा या वार्ड की निवासी होना जरूरी है। शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता पद के अनुसार निर्धारित नियमों के मुताबिक होगी। 12वीं पास महिलाओं के लिए यह भर्ती खास अवसर मानी जा रही है।

305 पदों पर होगी नियुक्ति

इस भर्ती अभियान के तहत कुल 305 रिक्तियां भरी जाएंगी। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और आंगनबाड़ी सहायिका के पद शामिल हैं। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू नहीं होगा, बल्कि मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

आवेदन से पहले नियम देखें

उम्मीदवार आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती अधिसूचना में अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, स्थानीय निवास और अन्य जरूरी शर्तों की जांच कर लें। गलत या अधूरी जानकारी के साथ किया गया आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

ब्लड कैंसर के 4 स्टेज? जानिए किस स्टेज में बीमारी सबसे ज्यादा खतरनाक होती है

हेल्थ डेस्क। ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें खून बनाने वाली कोशिकाओं या उनसे जुड़े ऊतकों में असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। हालांकि, ब्लड कैंसर की सभी किस्मों में स्टेजिंग एक जैसी नहीं होती। ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मायलोमा जैसे अलग-अलग प्रकार के कैंसर का आकलन अलग तरीके से किया जाता है। इसलिए केवल स्टेज 1 से 4 के आधार पर हर ब्लड कैंसर की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

स्टेज 1 में कैसी स्थिति होती है?

कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में शुरुआती चरण में बीमारी सीमित हिस्से में होती है। इस दौरान कई मरीजों में खास लक्षण दिखाई नहीं देते या सामान्य कमजोरी, थकान, वजन कम होना जैसे संकेत नजर आ सकते हैं। समय पर जांच होने पर बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है।

स्टेज 2 में बढ़ने लगती है बीमारी

दूसरे चरण में कैंसर प्रभावित कोशिकाएं शरीर के एक से अधिक हिस्सों में दिखाई दे सकती हैं। लिम्फोमा जैसे कैंसर में एक से ज्यादा लिम्फ नोड समूह प्रभावित हो सकते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर जांच रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की सीमा और उपचार की रणनीति तय करते हैं।

स्टेज 3 में बढ़ जाता है खतरा

तीसरे चरण में बीमारी शरीर के अधिक हिस्सों तक फैल चुकी हो सकती है। कुछ लिम्फोमा में डायफ्राम के ऊपर और नीचे दोनों तरफ लिम्फ नोड प्रभावित होना स्टेज 3 का संकेत हो सकता है। इस स्तर पर इलाज अधिक जटिल हो सकता है और विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होती है।

स्टेज 4 को क्यों माना जाता है ज्यादा गंभीर?

आम तौर पर जिन ब्लड कैंसर में स्टेज 4 का वर्गीकरण होता है, उसमें बीमारी शरीर के दूर के अंगों या ऊतकों तक फैल सकती है। उदाहरण के लिए कुछ लिम्फोमा में अस्थि मज्जा, फेफड़े या लिवर जैसे अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए स्टेज 4 को आम तौर पर अधिक गंभीर चरण माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इलाज की संभावना खत्म हो जाती है।

हर ब्लड कैंसर में 4 स्टेज नहीं होती

यह बात खास तौर पर ध्यान देने वाली है। ल्यूकेमिया में अक्सर स्टेज 1-4 वाला सिस्टम इस्तेमाल नहीं किया जाता। डॉक्टर ब्लड टेस्ट, बोन मैरो जांच, इमेजिंग और अन्य रिपोर्ट के आधार पर बीमारी का प्रकार और जोखिम निर्धारित करते हैं। वहीं लिम्फोमा में स्टेजिंग का इस्तेमाल ज्यादा आम है।

बिहार के लोगों की बल्ले-बल्ले! केंद्र सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

पटना। बिहार के शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजना के तहत राज्य में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC) के संचालन को मंजूरी दी गई है। यानी कुल 598 स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए लोगों तक प्राथमिक इलाज की सुविधा पहुंचाने की तैयारी है।

₹2 में ओपीडी, कई सुविधाएं मुफ्त

इन स्वास्थ्य केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीजों को डॉक्टर से परामर्श के लिए सिर्फ 2 रुपये का ओपीडी पर्चा लेना होगा। इसके अलावा जरूरी दवाएं और कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। यहां बीपी और शुगर की जांच, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

तय समय पर चलेगी ओपीडी

UPHC में मरीजों के लिए ओपीडी सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी। वहीं UHWC का संचालन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। इससे खासकर शहरी गरीब और स्लम इलाकों में रहने वाले लोगों को नजदीक ही प्राथमिक उपचार मिल सकेगा।

पटना के 11 केंद्र होंगे अपग्रेड

राजधानी पटना में पहले से संचालित 11 जन सेवा केंद्रों को आधुनिक शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी स्वास्थ्य केंद्र शुरू किए जाने की योजना है। इससे छात्रों और आसपास की आबादी को भी नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

सूर्य देव बदलेंगे अपनी चाल, 4 राशियों पर बरसेगी कृपा, धन-दौलत से भर सकती है झोली

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल में बदलाव का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। 17 अगस्त 2026 को सूर्य देव कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन कई जातकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर मिथुन, सिंह, तुला और वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय करियर, आर्थिक स्थिति और मान-सम्मान के लिहाज से शुभ रह सकता है।

मिथुन राशि

सूर्य का गोचर मिथुन राशि के जातकों के लिए लाभ के नए रास्ते खोल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कारोबार करने वालों के लिए भी नए संपर्क और बेहतर अवसर सामने आ सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ रुका हुआ पैसा मिलने की संभावना बन सकती है।

सिंह राशि

सूर्य देव का प्रवेश आपकी ही राशि में होने जा रहा है, इसलिए सिंह राशि वालों के लिए यह गोचर विशेष माना जा सकता है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और महत्वपूर्ण फैसले लेने में सफलता मिल सकती है। नौकरी में पद-प्रतिष्ठा बढ़ने के योग बन सकते हैं। कारोबारियों को भी अपने काम का विस्तार करने का मौका मिल सकता है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य का राशि परिवर्तन करियर के लिहाज से सकारात्मक परिणाम दे सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और क्षमता की सराहना हो सकती है। अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। आय के अतिरिक्त स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य का यह गोचर भाग्य का साथ दिला सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की उम्मीद है। नौकरी और कारोबार में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। यात्रा से लाभ हो सकता है और आर्थिक मामलों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

बिहार में बनेगा रिंग रोड, इन 3 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार की राजधानी पटना को जाम से राहत देने और उत्तर व दक्षिण बिहार के बीच आवागमन आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। पटना रिंग रोड के कन्हौली-शेरपुर हिस्से में छह लेन ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। करीब 9 किलोमीटर लंबी इस सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है।

इस परियोजना पर करीब 778 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्र और राज्य सरकार इस लागत को आधा-आधा वहन कर रही हैं। परियोजना के लिए लगभग 177 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। इसमें करीब 71 एकड़ बिहटा और 105 एकड़ मनेर अंचल में है। संबंधित गांवों के रैयतों के दस्तावेजों की जांच के साथ मुआवजा देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

पटना शहर को मिलेगी जाम से राहत

कन्हौली के पास बनने वाला जंक्शन कन्हौली-रामनगर, दानापुर-बिहटा और शेरपुर-कन्हौली मार्ग से जुड़ेगा। कन्हौली गोलंबर की ओर जाने के लिए करीब 1.5 किलोमीटर लंबा रैंप भी बनाया जाएगा। इसके बाद भारी वाहनों को पटना शहर में प्रवेश करने की जरूरत कम हो जाएगी।

छपरा, सीवान और मुजफ्फरपुर की तरफ से आने वाले मालवाहक वाहन शेरपुर-कन्हौली मार्ग के जरिए सीधे दक्षिण बिहार और झारखंड की ओर जा सकेंगे। इससे दानापुर, खगौल, सगुना मोड़ और बेली रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।

बिहटा और मनेर के लोगों को भी फायदा

छह लेन सड़क के बिहटा-दानापुर एलिवेटेड रोड से जुड़ने के बाद बिहटा एयरपोर्ट, आईआईटी पटना और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है। मनेर और बिहटा क्षेत्र के कई गांवों को भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी।

पटना, सारण और वैशाली से जुड़ेगा नेटवर्क

शेरपुर-कन्हौली सड़क का नेटवर्क पटना, सारण और वैशाली जिलों को जोड़ेगा। शेरपुर-दिघवारा के बीच बन रहे गंगा पुल से भी इसका संपर्क होगा। आगे यह मार्ग बिहटा-सरमेरा रोड और कच्ची दरगाह-बिदुपुर गंगा पुल से जुड़ेगा। दिघवारा से बिदुपुर के बीच चल रहा सड़क निर्माण पूरा होने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

यूपी-बिहार के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड हाईवे, इन जिलों के लिए खुशखबरी

न्यूज डेस्क। यूपी और बिहार के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए गाजीपुर-बलिया-मांझी घाट नेशनल हाईवे परियोजना अहम साबित हो सकती है। इस ग्रीनफील्ड हाईवे के बनने के बाद वाराणसी से छपरा का सफर पहले के मुकाबले काफी आसान और तेज होने की उम्मीद है। अभी जहां इस यात्रा में करीब साढ़े पांच घंटे लगते हैं, वहीं हाईवे तैयार होने के बाद समय घटकर करीब 3 घंटे रह सकता है।

इस परियोजना का मुख्य हिस्सा गाजीपुर से बिहार के सारण जिले के सहबलपुर तक प्रस्तावित है। आगे इसे छपरा से जोड़ा जाएगा। वहीं भरौली गोलंबर से बनने वाला लिंक रोड बक्सर को भी इस नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे गाजीपुर, बलिया, बक्सर और छपरा के बीच आवागमन बेहतर होगा।

कई शहरों को मिलेगा फायदा

नए हाईवे से सिर्फ यूपी और बिहार के सीमावर्ती इलाकों को ही फायदा नहीं होगा। वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ जैसे पूर्वांचल के शहरों से बिहार की ओर जाने वाले लोगों के लिए भी कनेक्टिविटी आसान होने की उम्मीद है। बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंच बेहतर होने से लखनऊ और दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिल सकती है।

व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा

बेहतर सड़क नेटवर्क का असर कारोबार पर भी पड़ सकता है। माल ढुलाई तेज होने से व्यापारियों को फायदा मिलेगा और परिवहन लागत व समय में कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और बिहार के पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

आपको बता दें की यह हाईवे पूर्वांचल और बिहार के बीच एक महत्वपूर्ण सड़क गलियारा बन सकता है। वाराणसी-छपरा यात्रा का समय कम होने के साथ बक्सर, छपरा और पटना की कनेक्टिविटी भी पहले से बेहतर होने की उम्मीद है।

ब्लड कैंसर होने के 5 बड़े संकेत! शरीर में दिखें ये बदलाव तो तुरंत हो जाएं सावधान

हेल्थ डेस्क। ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो रक्त बनाने वाले ऊतकों और कोशिकाओं को प्रभावित करती है। इसके कई प्रकार होते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा प्रमुख हैं। शुरुआती दौर में इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं, इसलिए शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हालांकि, इनमें से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब ब्लड कैंसर होना नहीं है। कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच महत्वपूर्ण होती है।

1. लगातार थकान और कमजोरी

ब्लड कैंसर के कुछ प्रकारों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो सकती है, जिससे एनीमिया जैसी स्थिति बन सकती है। इसके कारण व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर या सामान्य काम करने पर भी अधिक थकावट महसूस हो सकती है। यदि पर्याप्त आराम के बावजूद लंबे समय तक कमजोरी बनी रहे, तो इसकी जांच कराना उचित है।

2. बार-बार संक्रमण होना

बार-बार संक्रमण होना या संक्रमण से ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लगना भी ध्यान देने योग्य संकेत हो सकता है। कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में सफेद रक्त कोशिकाओं की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।

3. बिना वजह वजन कम होना

बिना डाइट या व्यायाम में बदलाव के अचानक वजन कम होना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में ब्लड कैंसर के साथ भूख कम लगना या शरीर में बीमारी के कारण होने वाले बदलावों की वजह से वजन तेजी से घट सकता है। अगर वजन लगातार कम हो रहा है और कोई स्पष्ट कारण नहीं है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

4. आसानी से चोट लगना या खून आना

बिना किसी बड़ी चोट के शरीर पर बार-बार नीले या बैंगनी निशान पड़ना, नाक या मसूड़ों से असामान्य रक्तस्राव होना भी जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। ब्लड कैंसर के कुछ प्रकारों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, जिससे खून जमने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

5. रात में अधिक पसीना और बुखार

बिना स्पष्ट कारण बार-बार बुखार आना या रात में इतना अधिक पसीना आना कि कपड़े या बिस्तर बदलना पड़े, कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में देखा जा सकता है। खासकर जब इसके साथ वजन कम होना, कमजोरी या लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे अन्य लक्षण भी मौजूद हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

13 से 23 अगस्त तक महायोग का असर! इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन-करियर में लाभ

ज्योतिष डेस्क। अगस्त का यह समय कुछ राशि के जातकों के लिए बेहद खास रहने वाला है। 13 अगस्त से 23 अगस्त के बीच बनने वाले ग्रहों के विशेष संयोग का असर कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ जातकों को करियर, धन, कारोबार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए 13 से 23 अगस्त का समय उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आगे बढ़ने की संभावना है।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह अवधि करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत और प्रदर्शन की सराहना हो सकती है। व्यापार में नए संपर्क भविष्य में लाभ का कारण बन सकते हैं।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रह सकता है। नौकरी में पद और प्रतिष्ठा बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने से महत्वपूर्ण काम आसानी से पूरे हो सकते हैं। कारोबार में विस्तार की योजना बना रहे लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों को 13 से 23 अगस्त के बीच भाग्य का साथ मिल सकता है। शिक्षा, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े लोगों के लिए समय सकारात्मक रह सकता है। मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। परिवार के साथ संबंध मधुर होंगे। इस दौरान कोई महत्वपूर्ण यात्रा भी करनी पड़ सकती है, जो भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

5. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह अवधि आर्थिक और करियर के लिहाज से अच्छी रह सकती है। नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी सकारात्मक खबर मिलने की संभावना है। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी बेहतर अवसर मिल सकता है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! प्रमोशन को लेकर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। रेलवे में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए प्रमोशन से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने निचले पद से ऊंचे पद पर पदोन्नति के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा अवधि को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। नए निर्देशों के बाद कई कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए दो साल की सेवा पूरी होने तक इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते निर्धारित मूल्यांकन अवधि के भीतर आवश्यक सेवा अवधि पूरी हो जाए।

प्रमोशन के नियम को लेकर क्या बदला?

निचले ग्रेड से उच्च ग्रेड में प्रमोशन के लिए अब तक न्यूनतम दो वर्ष की नियमित सेवा यानी रेजीडेंसी पीरियड की शर्त लागू रही है। समस्या यह थी कि इस दो साल की अवधि की गणना किस तारीख तक की जानी है, इसे लेकर कई स्तरों पर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।

कई बार प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने की तारीख तक कर्मचारी के दो साल पूरे नहीं होते थे और इसी वजह से उसकी पात्रता पर सवाल उठ जाता था। अब रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सेवा अवधि को संबंधित वैकेंसी असेसमेंट पीरियड के भीतर पूरा किया जाना जरूरी होगा।

सिलेक्शन पोस्ट के लिए 15 महीने का चक्र

जिन पदों पर प्रमोशन चयन प्रक्रिया, लिखित परीक्षा या योग्यता के आधार पर होता है, उन्हें सिलेक्शन पोस्ट के रूप में माना जाता है। ऐसे मामलों में दो साल की आवश्यक सेवा अवधि को 15 महीने की वैकेंसी असेसमेंट अवधि के भीतर पूरा करना होगा। इससे उन कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है, जिनकी दो साल की सेवा प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होने की तारीख तक पूरी नहीं हुई थी, लेकिन निर्धारित मूल्यांकन अवधि के दौरान वे आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर रहे हैं।

नॉन-सिलेक्शन पोस्ट में 12 महीने की अवधि

वहीं, जिन पदों पर प्रमोशन मुख्य रूप से वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर होता है, उन्हें नॉन-सिलेक्शन पोस्ट कहा जाता है। ऐसे मामलों में दो साल की सेवा की शर्त को 12 महीने के वैकेंसी असेसमेंट चक्र के भीतर पूरा करना होगा। इस व्यवस्था से प्रमोशन की पात्रता तय करने में पहले से चली आ रही तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति कम होने की उम्मीद है।

लगातार की गई एडहॉक सेवा भी हो सकती है शामिल

रेलवे बोर्ड के स्पष्टीकरण में एडहॉक सेवा को लेकर भी महत्वपूर्ण बात सामने आई है। यदि किसी कर्मचारी ने नियमित नियुक्ति से ठीक पहले बिना किसी ब्रेक के एडहॉक आधार पर सेवा की है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार उस सेवा अवधि को भी न्यूनतम दो साल की सेवा की गणना में शामिल किया जा सकेगा। इस प्रावधान से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी नियमित नियुक्ति से पहले लगातार एडहॉक सेवा रही है।

जूनियर पात्र हुआ तो सीनियर को भी मिलेगा लाभ

नए स्पष्टीकरण का एक अहम पहलू वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों की पात्रता से जुड़ा है। यदि किसी जूनियर कर्मचारी को प्रमोशन के लिए पात्र माना जाता है, तो उससे वरिष्ठ कर्मचारी को भी प्रमोशन का लाभ मिल सकता है, भले ही उस वरिष्ठ कर्मचारी की निचले पद पर दो साल की कुल सेवा तकनीकी रूप से पूरी न हुई हो। इसका उद्देश्य प्रमोशन प्रक्रिया में वरिष्ठ कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना और अनावश्यक विसंगति को रोकना है।

पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा नया नियम

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से बंद हो चुके प्रमोशन मामलों को इस नए स्पष्टीकरण के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नियम में किया गया यह बदलाव मुख्य रूप से वर्तमान और आने वाली प्रमोशन प्रक्रियाओं पर लागू होगा।

रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला! अनुकंपा नियुक्ति के नियम बदले, आश्रितों को मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली। रेलवे में अनुकंपा के आधार पर नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों के आश्रितों के लिए राहत की खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े शैक्षणिक योग्यता के नियम को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। नए निर्देशों से उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिनके आश्रित आवेदन के समय निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं कर पाए थे।

आवेदन के समय योग्यता पूरी न होने पर भी मौका

अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करते वक्त अगर आश्रित के पास निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं है, तो केवल इसी आधार पर उसका दावा खत्म नहीं होगा। यदि वह तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक पढ़ाई पूरी कर लेता है और नियुक्ति की अन्य शर्तों को पूरा करता है, तो उसे नौकरी के लिए पात्र माना जा सकता है। इस बदलाव से खास तौर पर उन मामलों में राहत मिलेगी, जहां कर्मचारी की मृत्यु या मेडिकल रूप से अयोग्य घोषित होने के समय उसके परिवार का कोई आश्रित अभी पढ़ाई कर रहा था।

पहले क्या थी परेशानी?

पहले कई मामलों में आवेदन के समय निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होने पर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती थी। कम उम्र या पढ़ाई पूरी नहीं होने के कारण आश्रितों के सामने नौकरी पाने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। नए स्पष्टीकरण का उद्देश्य ऐसे मामलों में नियमों को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है।

पांच साल की समय-सीमा तय

रेलवे बोर्ड के नए निर्देशों के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी की मृत्यु अथवा मेडिकल अनफिट होने की तारीख से पांच वर्ष के भीतर आश्रित को संबंधित पद के लिए जरूरी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हासिल करनी होगी। इसका मतलब यह है कि आवेदन के समय योग्यता अधूरी होने के बावजूद आश्रित को बाद में पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिल सकता है, लेकिन निर्धारित समय-सीमा का पालन करना जरूरी होगा।

नाबालिग आश्रितों के लिए अलग प्रावधान

अगर कर्मचारी की मृत्यु या मेडिकल अनफिट होने के समय आश्रित नाबालिग था, तो उसके लिए अलग समय-सीमा रखी गई है। ऐसे मामलों में आश्रित के 18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद अगले दो वर्षों के भीतर आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हासिल करनी होगी। यानी नाबालिग आश्रितों को बालिग होने के बाद पढ़ाई पूरी करने के लिए भी निर्धारित समय दिया जाएगा।

सिर्फ पढ़ाई पूरी करना ही पर्याप्त नहीं

रेलवे बोर्ड की ओर से दी गई राहत का अर्थ यह नहीं है कि शैक्षणिक योग्यता हासिल करते ही नौकरी स्वतः मिल जाएगी। आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी अन्य सभी पात्रता और निर्धारित शर्तों को भी पूरा करना होगा। अधिकारी के अनुसार, यदि आश्रित निर्धारित अवधि के अंदर आवश्यक शैक्षणिक योग्यता हासिल कर लेता है और बाकी पात्रता मानकों पर भी खरा उतरता है, तो उसे अनुकंपा नियुक्ति के लिए योग्य माना जाएगा।

बिहार के शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी! 1 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। अब छुट्टी लेने के लिए शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार 1 नवंबर से छुट्टी की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षक घर बैठे छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

सरकार की योजना के मुताबिक, छुट्टी के आवेदन पर अधिकतम 48 घंटे के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था की जाएगी। इससे शिक्षकों को आवेदन के बाद लंबे समय तक जवाब का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

ऑनलाइन होगी छुट्टी की पूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को छुट्टी के लिए डिजिटल माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित अधिकारी के पास ऑनलाइन पहुंचेगा और वहीं से उसकी जांच के बाद मंजूरी या अस्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे कागजी आवेदन और कार्यालयों में अनावश्यक भागदौड़ कम होने की उम्मीद है। साथ ही छुट्टी के आवेदनों की निगरानी भी आसान हो सकेगी।

देरी हुई तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने छुट्टी के आवेदन को समय पर निपटाने पर भी जोर दिया है। तय समय सीमा के भीतर आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने या अनावश्यक देरी करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पटना कॉलेजिएट स्कूल के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिक्षकों की सुविधाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।

मॉडल स्कूलों में मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

वहीं, राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ छात्रों के लिए भी नई पहल की जा रही है। मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों को मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों में छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर तैयारी का अवसर देना है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल का प्रभाव अगले दो-तीन वर्षों में बेहतर तरीके से दिखाई देगा।

बिहारवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जन्म-मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाना आसान!

पटना। बिहार में जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने इन प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों में नोटरी पब्लिक के शपथपत्र को मान्यता देने को लेकर अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इससे प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान लोगों को होने वाली अनावश्यक परेशानी कम हो सकती है।

सरकार के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि नियम के अनुसार नोटरी पब्लिक द्वारा तैयार किए गए शपथपत्र को स्वीकार करने में बेवजह अड़चन न आए। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जिन्हें प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अंचल कार्यालयों में प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

नोटरी के शपथपत्र को लेकर निर्देश

राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में पहले दिए गए प्रशासनिक निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अधिकृत नोटरी के समक्ष तैयार और दर्ज किए गए शपथपत्र को कानूनी प्रावधानों के अनुसार मान्यता दी जानी चाहिए। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटरी पब्लिक से शपथपत्र तैयार कराया है, तो केवल नोटरी के सामने बनाए जाने के आधार पर उसे अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

लोगों को बार-बार कार्यालय जाने से राहत

जन्म, मृत्यु या वंशावली प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाले लोगों को दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया में कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर शपथपत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर उन्हें दोबारा कार्यालय जाना पड़ सकता है। सरकार के निर्देश से ऐसी दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। यदि शपथपत्र नियमों के अनुरूप है, तो उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

आवेदन के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी

सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही, यदि किसी स्तर पर नोटरी पब्लिक के वैध शपथपत्र को लेकर समस्या सामने आती है, तो उसे दूर करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है। इस व्यवस्था से प्रमाण पत्र बनवाने वाले आम लोगों को प्रक्रिया समझने और दस्तावेज जमा करने में पहले की तुलना में आसानी होने की उम्मीद है।

मर्दों की कमजोरी छूमंतर! ये 4 जूस रोज पिएं, शरीर में भर जाएगी जबरदस्त एनर्जी

हेल्थ डेस्क। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खान-पान और पर्याप्त आराम न मिलने की वजह से कई पुरुष दिनभर थकान और कम ऊर्जा महसूस करते हैं। ऐसे में डाइट में पौष्टिक फलों और सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। कुछ जूस शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट देने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, जूस को जरूरत से ज्यादा पीना भी सही नहीं है। फल का जूस बनाने पर उसका फाइबर कम हो जाता है और इसे आसानी से ज्यादा मात्रा में पी लिया जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार, फल खाने को जूस पीने से प्राथमिकता देना बेहतर है और जूस लेते समय 100% जूस तथा बिना अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनना चाहिए।

1. अनार का जूस

अनार में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व पाए जाते हैं। बिना अतिरिक्त चीनी वाला अनार का जूस संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। यह शरीर को तरल पदार्थ और पोषण देने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

2. चुकंदर का जूस

चुकंदर में प्राकृतिक नाइट्रेट पाए जाते हैं, जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड से जुड़े रास्तों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इसे व्यायाम करने वाले लोगों की डाइट में भी शामिल किया जाता है। हालांकि, इसे पीने के साथ संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।

3. संतरे का जूस

संतरा विटामिन C का अच्छा स्रोत है। घर पर ताजे संतरे से तैयार किया गया बिना चीनी का जूस शरीर को विटामिन C और तरल पदार्थ उपलब्ध करा सकता है। बेहतर विकल्प यह है कि जूस की जगह कई बार पूरा संतरा खाया जाए, क्योंकि पूरे फल में फाइबर भी मिलता है।

4. आंवले का जूस

आंवला विटामिन C और अन्य पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। इसे सीमित मात्रा में बिना अतिरिक्त चीनी के लिया जा सकता है। बाजार में मिलने वाले मीठे आंवला ड्रिंक के बजाय ताजा आंवले से तैयार पेय बेहतर विकल्प हो सकता है।

बिहार में गरीबों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात

पटना। बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने शहरों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 598 नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी दी है। इन केंद्रों का खास फायदा स्लम बस्तियों और जरूरतमंद लोगों को मिलेगा। इन 598 केंद्रों में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC) शामिल हैं।

सिर्फ 2 रुपये में ओपीडी की सुविधा

नए स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ काफी कम खर्च में मिलेगा। ओपीडी में इलाज के लिए केवल 2 रुपये का पर्चा शुल्क लिया जाएगा। केंद्रों पर मुफ्त दवाओं और जांच समेत कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी। UPHC का संचालन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक, जबकि UHWC सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित किए जाएंगे।

एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

इन केंद्रों पर सामान्य बीमारियों के इलाज के अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य परामर्श और संचारी रोगों की जांच जैसी सुविधाएं मिलेंगी। गैर-संचारी रोगों की जांच और दवा वितरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

स्लम इलाकों पर रहेगा विशेष फोकस

सरकार की योजना शहरी गरीबों तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंचाने की है। जरूरत वाले स्लम क्षेत्रों में किराये के भवनों में स्वास्थ्य केंद्र चलाने के साथ स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा सकेंगे। इससे लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी।

गरीब परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा

598 नए केंद्रों के जरिए शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक इलाज लोगों के करीब पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए कम शुल्क में ओपीडी इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बड़ी राहत साबित हो सकती है।

बिहार में राशन कार्ड को लेकर अपडेट, लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जिनका नाम किसी कारण से राशन कार्ड की सूची से बाहर हो गया है। ऐसे पात्र परिवार अब दोबारा राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की व्यवस्था के तहत पात्रता पूरी करने वाले परिवारों को फिर से आवेदन का अवसर दिया जा रहा है।

आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। विभाग आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित परिवार की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन करेगा। जांच में यदि परिवार सरकारी खाद्यान्न योजना के लिए पात्र पाया जाता है, तो उसका नाम दोबारा राशन कार्ड में शामिल किया जा सकता है।

ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

राशन कार्ड के लिए दोबारा आवेदन करने वाले लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन लोगों को खुद ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी है, वे नजदीकी साइबर कैफे या वसुधा केंद्र की सहायता ले सकते हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी आवेदन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। लाभुकों के लिए माय राशन ऐप भी एक विकल्प है, जिसके माध्यम से पात्र परिवार घर बैठे आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

आवेदन से पहले दस्तावेज रखें तैयार

आवेदन करते समय जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। परिवार के मुखिया के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड की जानकारी मांगी जा सकती है। इसके अलावा परिवार की फोटो और निवास से संबंधित प्रमाण भी तैयार रखना चाहिए। जरूरत के अनुसार आय प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी भी देनी पड़ सकती है। आवेदन से पहले संबंधित पोर्टल या विभाग की ओर से मांगे गए दस्तावेजों की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि बाद में आवेदन में कोई कमी न रह जाए।

फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

ऑनलाइन आवेदन में परिवार के सदस्यों का नाम, आधार से जुड़ी जानकारी और अन्य विवरण सावधानी से भरना चाहिए। किसी दस्तावेज में नाम या दूसरी जानकारी अलग होने पर सत्यापन के दौरान परेशानी आ सकती है। इसलिए आवेदन जमा करने से पहले पूरे फॉर्म को दोबारा जांचना बेहतर होगा। सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करने के बाद ही आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करें।

बिहार में मुखिया बनने की तैयारी में हैं? पहले जान लें पूरी पात्रता

पटना। बिहार में अगले पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में राजनीतिक हलचल धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल वर्ष 2026 के आखिर में पूरा होने की संभावना के बीच संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई गांवों में संभावित दावेदार लोगों से संपर्क साधने और अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।

हालांकि मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों को केवल जनसंपर्क और राजनीतिक समीकरण पर ध्यान देने के बजाय कानूनी पात्रता और अयोग्यता के नियमों को भी समझना जरूरी है। नियमों पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में नामांकन के स्तर पर ही परेशानी हो सकती है।

परिसीमन के बाद बदल सकता है चुनावी समीकरण

आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाना है। आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार पंचायतों और वार्डों की संरचना में बदलाव हो सकता है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या और आरक्षण व्यवस्था में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर मुखिया पद के संभावित दावेदारों पर पड़ेगा। किसी पंचायत की सीट आरक्षित होने या सामान्य होने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

मुखिया चुनाव के लिए 21 साल उम्र जरूरी

मुखिया पद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र का व्यक्ति पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए उम्मीदवार नहीं बन सकता। इसके साथ ही मतदाता सूची से जुड़ी पात्रता भी महत्वपूर्ण है। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को संबंधित चुनाव क्षेत्र से जुड़े मतदाता संबंधी नियमों का पालन करना होगा। इसलिए नामांकन से पहले मतदाता सूची में अपने नाम और अन्य विवरण की जांच करना समझदारी होगी।

सरकारी नौकरी करने वालों को ध्यान

सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों के लिए चुनाव लड़ने को लेकर अलग नियम लागू होते हैं। केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी सामान्य तौर पर अपने पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते। इसी तरह स्थानीय निकाय या ऐसे पदों पर काम करने वाले लोगों की पात्रता भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होती है। संभावित उम्मीदवारों को नामांकन से पहले अपनी नौकरी या पद की स्थिति की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए।

लाभ के पद से जुड़ा नियम भी अहम

यदि कोई व्यक्ति पंचायत के अधीन ऐसा पद रखता है जिससे उसे वेतन या अन्य लाभ प्राप्त होता है, तो यह चुनाव लड़ने की पात्रता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उम्मीदवार को यह देखना होगा कि उसके पास ऐसा कोई पद तो नहीं है, जिसे कानून के तहत चुनावी अयोग्यता का आधार माना जा सकता है।

नागरिकता और मानसिक स्वास्थ्य

मुखिया पद के लिए उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसके अलावा कानून में कुछ ऐसी परिस्थितियों का भी उल्लेख है, जिनमें व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकता है। उदाहरण के तौर पर सक्षम न्यायिक प्राधिकरण द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किए जाने की स्थिति में चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए नामांकन के समय उम्मीदवार की कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

सजा और बर्खास्तगी का भी असर

सरकारी सेवा से गंभीर कदाचार के कारण बर्खास्त किए गए व्यक्ति के मामले में भी चुनावी अयोग्यता के प्रावधान लागू हो सकते हैं। वहीं आपराधिक मामले में अदालत से हुई दोषसिद्धि और सजा की प्रकृति के आधार पर भी चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना एक जैसी स्थिति नहीं है। इसलिए आपराधिक मामलों से जुड़े संभावित उम्मीदवारों को अपने मामले की कानूनी स्थिति के आधार पर नियमों की जांच करनी चाहिए।

दस्तावेजों की तैयारी पहले से रखें पूरी

चुनाव की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद दस्तावेज तैयार करने के लिए समय कम मिल सकता है। ऐसे में संभावित उम्मीदवारों को अपनी उम्र से जुड़े प्रमाण, मतदाता सूची में विवरण, नागरिकता और आरक्षण श्रेणी से संबंधित जरूरी दस्तावेजों की स्थिति पहले ही जांच लेनी चाहिए। साथ ही नामांकन के समय निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा मांगे जाने वाले दस्तावेज और शपथपत्र से जुड़ी आवश्यकताओं को भी ध्यान से समझना होगा।

अंतिम नियमों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से लें

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर परिसीमन, आरक्षण, चुनाव कार्यक्रम और नामांकन की अंतिम शर्तें संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और निर्वाचन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार ही लागू होंगी। इसलिए संभावित उम्मीदवारों को किसी भी दावे या स्थानीय चर्चा के आधार पर अंतिम निर्णय लेने के बजाय आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।