मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ समय में यूरोप के क्लीन एनर्जी नियमों के कड़े होने और बाजार में बदलाव को देखते हुए भारत ने निर्यात को डायवर्सिफाई करने की रणनीति बनाई है। इसके लिए भारत सरकार और विदेशी देशों के बीच जी-टू-जी (सरकार से सरकार) लेवल की बातचीत जारी है। अगले छह महीनों में स्टील क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते होने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया और एशिया बने नए लक्ष्य
विकासशील बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्रों, जैसे कि पश्चिम एशिया, को अब भारत स्टील निर्यात का प्रमुख क्षेत्र मान रहा है। अधिकारी का कहना है कि इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग का फायदा उठाकर भारत स्थायी निर्यात बाजार स्थापित करना चाहता है।
उत्पादन और निर्यात के आंकड़े
रॉयटर्स के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत ने 48 लाख मीट्रिक टन तैयार स्टील का शुद्ध निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33.3 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में 46.5 लाख मीट्रिक टन स्टील का आयात किया गया। स्थानीय उद्योग की सुरक्षा के लिए सरकार ने चीन से आने वाले सस्ते स्टील पर कस्टम टैरिफ लागू किया है। पहले वर्ष में यह 12%, दूसरे में 11.5% और तीसरे वर्ष में 11% लागू रहेगा।
घरेलू उत्पादन और मांग
अप्रैल-दिसंबर 2025 के बीच भारत ने 117.6 लाख मीट्रिक टन तैयार स्टील का उत्पादन किया, जबकि घरेलू खपत 119.3 लाख टन रही। इसी अवधि में कच्चे स्टील का उत्पादन 123.9 लाख मीट्रिक टन रहा।
कीमतों में बढ़ोतरी
कमोडिटी कंसल्टेंसी बिगमिंट के अनुसार, जनवरी 2026 में प्रमुख भारतीय स्टील निर्माताओं ने हॉट-रोल्ड और कोल्ड-रोल्ड स्टील की कीमतों में 2,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन तक बढ़ोतरी की। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन और निर्यात बाजार को संतुलित रखना बताया गया है। सरकार के इस कदम से भारत दुनिया के स्टील बाजार में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी बने रहने की स्थिति को और मजबूत करेगा।

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