बिहार में जमीन-फ्लैट बिक्री के नए नियम लागू, जानें जरूरी बातें

पटना। बिहार में रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ती अनियमितताओं, ठगी और अवैध प्लॉटिंग को देखते हुए अब बिहार रेरा (Real Estate Regulatory Authority) ने सख्त कदम उठाए हैं। रेरा ने राज्य में जमीन, फ्लैट और दुकान की खरीद-बिक्री को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। यह नया नियम 2025 से प्रभावी हो गया है और इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलने की संभावना है।

क्या है नया नियम?

रेरा की इस नई व्यवस्था के अनुसार:

1 .रेरा निबंधित एजेंटों को एक विशिष्ट क्यूआर कोड दिया जाएगा। 

2 .अब केवल रेरा निबंधित प्रोजेक्ट्स में ही फ्लैट, दुकान या प्लॉट की बिक्री की अनुमति होगी। 

3 .एजेंट यदि खुद प्लॉटिंग कर जमीन बेचते हैं, तो यह गैरकानूनी माना जाएगा और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा। 

4 .निबंधित एजेंटों को अपने ऑफिस और प्रचार सामग्री पर अपनी रजिस्ट्रेशन संख्या और क्यूआर कोड दिखाना अनिवार्य होगा।

क्यूआर कोड से कैसे मिलेगा लाभ?

यह क्यूआर कोड रेरा द्वारा अधिकृत होगा और इसे स्कैन करते ही उस एजेंट की पूरी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएगी – जैसे कि उसका रजिस्ट्रेशन वैध है या नहीं, वह किन प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है, आदि। इससे ग्राहक फर्जी एजेंटों से बच सकेंगे और कानूनी रूप से सुरक्षित निवेश कर सकेंगे।

क्यों उठाया गया यह कदम?

रेरा द्वारा कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि कुछ रजिस्टर्ड एजेंट गैरकानूनी ढंग से खुद प्लॉटिंग कर जमीन बेच रहे हैं। यह न केवल रेरा कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता को धोखा देना भी है। अब ऐसे एजेंटों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

आम लोगों के लिए क्या फायदे होंगे?

पारदर्शिता बढ़ेगी – निवेश से पहले ग्राहक को सारी जानकारी मिलेगी।

कानूनी सुरक्षा मिलेगी – रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट में निवेश करना अब ज्यादा सुरक्षित है।

ठगी की आशंका कम होगी – वैध रजिस्ट्रेशन की जांच मोबाइल से तुरंत की जा सकती है।

फर्जी एजेंटों पर रोक लगेगी – अब केवल अधिकृत एजेंट ही रियल एस्टेट में कार्य कर सकेंगे।

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