सुरक्षा पर विशेष ध्यान
एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 295 किलोमीटर क्षेत्र में पक्की चहारदीवारी और मजबूत टक्कर रोधी बैरियर लगाए जा रहे हैं। पहले के अनुभवों में देखा गया कि केवल तारबंदी होने पर आसपास के गांवों के लोग रास्ता बना लेते थे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती थी। इसी कारण इस बार स्थायी और मजबूत दीवार बनाई जा रही है, ताकि अनधिकृत प्रवेश रोका जा सके और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
बैठक में दिए गए निर्देश
औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समयसीमा में पूरा हो। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को शेष कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया है, ताकि संचालन में कोई देरी न हो।
प्रदेश को मिलेगा बड़ा लाभ
यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को तेज रफ्तार संपर्क देगा। इसके शुरू होने से यात्रा समय घटेगा, परिवहन लागत कम होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। जिन जिलों से यह मार्ग गुजरेगा, वहां नए उद्योग, गोदाम, परिवहन केंद्र और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। जमीन की कीमतों में भी वृद्धि देखी जा सकती है।
नई परियोजनाओं की तैयारी
बैठक में अन्य प्रस्तावित मार्गों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने निर्देश दिया है कि विंध्य क्षेत्र और अन्य हिस्सों को जोड़ने वाले नए एक्सप्रेसवे तथा संपर्क मार्गों का शिलान्यास तय समय में कराया जाए। इससे प्रदेश का सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा।
विकास की ओर बड़ा कदम
गंगा एक्सप्रेसवे का संचालन शुरू होते ही उत्तर प्रदेश को बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक प्रगति, निवेश और क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अप्रैल में इसके शुरू होने के साथ ही कई जिलों में विकास की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।
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