पिछले समय में रैयतों को दस्तावेज़ लेने के लिए अंचल कार्यालय जाना पड़ता था। कभी-कभी कोर्ट में एफिडेविट कराने या कर्मचारी से सत्यापन कराना भी आवश्यक होता था। इस प्रक्रिया में लंबा समय लगता था और कई बार बिचौलियों की दखलंदाजी भी सामने आती थी। अब नई डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड, वेरीफिकेशन और डाउनलोड किए जा सकेंगे।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
1 .सबसे पहले आवेदक को भू-अभिलेख पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।
2 .लॉग-इन करने के बाद अपलोड बटन पर क्लिक करें। फॉर्म में कुछ जानकारियां पहले से भरी होती हैं और बाकी आवेदक को भरनी होती हैं। इसमें दस्तावेज़ का बारकोड और फाइल का बारकोड डालना अनिवार्य है।
3 .बारकोड की सही जानकारी दर्ज करना जरूरी है, क्योंकि यही दस्तावेज़ की पहचान और आगे की प्रक्रिया निर्धारित करता है।
4 .अगला चरण शुरू करने के लिए नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें।
5 .अब अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से स्कैन की गई PDF फाइल अपलोड करें और स्क्रीन पर दिखाई जा रही जानकारी को ध्यानपूर्वक चेक करें।
6 .डिक्लेरेशन बॉक्स को चेक करना जरूरी है, जो दस्तावेज़ की वैधता की पुष्टि करता है।
7 .अंत में अपलोड बटन दबाएं। सफल अपलोड के बाद पोर्टल पर संदेश दिखाई देगा और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर सूचना भी भेजी जाएगी।
डिजिटल प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेज़ वेरिफाइड पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगा। इसके बाद इसे डिजिटल साइन के साथ सर्टिफाइड कॉपी के लिए आगे अनुरोध किया जा सकता है। राजस्व विभाग का कहना है कि यह पहल न केवल भूमि रिकॉर्ड से जुड़े विवादों को कम करेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। इस नई व्यवस्था से रैयतों को समय और मेहनत दोनों की बचत होगी और भ्रष्टाचार के अवसर भी कम होंगे।

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