किडनी ट्रांसप्लांट कैसे होता हैं? कौन बन सकता है किडनी डोनर

हेल्थ डेस्क। किडनी ट्रांसप्लांट आज की आधुनिक चिकित्सा का एक अहम हिस्सा बन चुका है, जो गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए जीवनदान साबित होता है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब मरीज की किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर देती है और डायलिसिस से राहत पर्याप्त नहीं होती।

किडनी ट्रांसप्लांट कैसे होता है?

किडनी ट्रांसप्लांट में आमतौर पर मरीज की खराब किडनी को पूरी तरह निकालने की जरूरत नहीं होती। सर्जरी के दौरान नए स्वस्थ किडनी को मरीज के पेट या पीठ की निचली हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है। ऑपरेशन आम तौर पर 3 से 4 घंटे में पूरा होता है और मरीज को इसके बाद कुछ दिन अस्पताल में रहकर निगरानी में रखा जाता है।

सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को दवाइयों का नियमित सेवन अनिवार्य होता है, ताकि शरीर नई किडनी को अस्वीकार न करे। विशेषज्ञों के अनुसार, सफल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज लगभग सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन समय-समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव जरूरी होते हैं।

कौन बन सकता है किडनी डोनर?

किडनी दान करने वाले डोनर की आयु आम तौर पर 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। डोनर की किडनी स्वस्थ और बिना किसी गंभीर बीमारी के होना जरूरी है। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार या कभी-कभी अनजान व्यक्ति भी डोनर बन सकता है, बशर्ते मेडिकल टेस्ट में दोनों की बॉडी कम्पैटिबल हों।

डोनर बनने के लिए जरूरी है कि उसका रक्त समूह और ऊतक मरीज के साथ मेल खाता हो। इसके अलावा, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों अच्छा होना चाहिए। ट्रांसप्लांट से पहले डोनर का पूरा मेडिकल और लैब टेस्ट किया जाता है, ताकि सर्जरी सुरक्षित और सफल हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट न केवल मरीज की जीवन अवधि बढ़ाता है, बल्कि उसकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार लाता है। इसलिए समय रहते डॉक्टर से परामर्श करना और सही डोनर का चयन करना बेहद जरूरी है।

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