भाव गिरने पर किसानों को मिलेगा सहारा
आलू की बंपर पैदावार होने पर बाजार में कीमत कम हो जाती है। ऐसे समय किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की व्यवस्था की है। इसके लिए फिलहाल 100 करोड़ रुपये की टोकन राशि रखी गई है।
योजना में उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के अंतर के आधार पर किसानों को सहायता दी जाएगी। एक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर और प्रति हेक्टेयर 240 क्विंटल तक के हिसाब से लाभ ले सकेगा। इससे करीब 12 से 14 लाख किसानों को फायदा मिलने का अनुमान है।
कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू पर भी राहत
दूसरी योजना निजी शीतगृहों में आलू रखने वाले किसानों के लिए है। इसके तहत भंडारण शुल्क में राहत देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की योजना लागू की गई है। किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सहायता मिलेगी और एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक का लाभ दिया जाएगा। इस योजना से 15 लाख से अधिक किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सस्ते मिलेंगे बेहतर गुणवत्ता वाले बीज
तीसरी योजना आलू की नई और बेहतर किस्मों के बीज से जुड़ी है। सरकार ने इसके लिए 5 करोड़ रुपये की बीज विक्रय दर छूट योजना लागू की है। इसके तहत विभागीय आधार श्रेणी के आलू बीज खरीदने पर किसानों को अधिकतम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक की छूट दी जाएगी। इससे खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी और 15 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलने की संभावना है।
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
तीनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पात्र किसानों को मिलने वाली सहायता आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी। सरकार के इस कदम से आलू किसानों को बाजार भाव, भंडारण और बीज, तीनों मोर्चों पर आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

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