इन परियोजनाओं को व्यय वित्त समिति की बैठकों में हरी झंडी मिली है। मंजूर योजनाओं की लागत अलग-अलग है। कुछ सड़क परियोजनाएं करीब 25 करोड़ रुपये की हैं, जबकि सबसे बड़ी परियोजना की लागत लगभग 665 करोड़ रुपये तक बताई गई है। 200 करोड़ रुपये से अधिक वाली योजनाओं को आगे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
इन जिलों में सड़क परियोजनाएं
स्वीकृत योजनाओं में सीतापुर, मीरजापुर, देवरिया, महाराजगंज, सोनभद्र, बांदा, वाराणसी, चित्रकूट, झांसी, लखनऊ, लखीमपुर खीरी और संभल शामिल हैं। इसके अलावा गोरखपुर, गोंडा, एटा समेत कई अन्य जिलों को भी नई सड़क परियोजनाओं का लाभ मिलेगा।
गोरखपुर और गोंडा को कई योजनाएं
दूसरी बैठक में गोरखपुर की तीन और गोंडा की छह सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली। वहीं एटा, सीतापुर, सोनभद्र, देवरिया और वाराणसी की परियोजनाएं भी इसमें शामिल रहीं। इससे इन क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क के विस्तार और आवागमन को बेहतर करने की उम्मीद है।
सड़क के साथ दूसरे निर्माण कार्यों को भी मंजूरी
बैठकों में सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि पशुपालन और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए चार पशु चिकित्सालय, एक ब्लॉक स्तरीय और एक प्राथमिक पशु चिकित्सालय की परियोजनाएं मंजूर हुई हैं। फर्रुखाबाद में जिला ग्राम्य विकास संस्थान के भवनों के निर्माण को भी हरी झंडी मिली है।
औद्योगिक विकास की योजनाओं पर भी दिया गया जोर
मथुरा और सोनभद्र में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों के निर्माण तथा कानपुर देहात, प्रयागराज, फतेहपुर, हमीरपुर और झांसी में बीडा से जुड़ी 10 विकास परियोजनाओं को भी वित्तीय मंजूरी मिली है। इससे सड़क के साथ शिक्षा, ग्रामीण विकास और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा।

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