भारत के सहारे अब यूरोप, अमेरिका-रूस हुए आउट, चीन सन्न!

नई दिल्ली। यूरोप में डीजल की सप्लाई को लेकर बदलते हालात के बीच भारत एक अहम सप्लायर बनकर उभरा है। रूस से डीजल का निर्यात घटने और अमेरिका से यूरोप पहुंचने वाली ईंधन खेप कमजोर पड़ने के कारण यूरोपीय बाजार में भारतीय रिफाइनरियों की भूमिका बढ़ गई है।

वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में बाब-अल-मंदेब मार्ग से यूरोप पहुंचने वाले डीजल में भारत की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी रही। इस रास्ते से यूरोप को रोजाना लगभग 2 लाख बैरल डीजल भेजा गया।

रूस की सप्लाई में भारी गिरावट

रूस से समुद्री डीजल निर्यात में बड़ी गिरावट आई है। रिफाइनरियों पर हमलों और निर्यात ढांचे में व्यवधान के कारण वहां से यूरोप को मिलने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। अगस्त के शुरुआती 25 दिनों में रूस का समुद्री डीजल निर्यात काफी नीचे रहा।

अमेरिका से यूरोप आने वाली आपूर्ति भी पहले जैसी मजबूत नहीं रही। ऐसे में भारत की रिफाइनिंग क्षमता यूरोप के लिए बड़ा सहारा बन रही है।

भारत की रिफाइनरियां बनीं ताकत

भारत दुनिया के बड़े तेल रिफाइनिंग देशों में शामिल है और उसकी कुल शोधन क्षमता घरेलू जरूरत से अधिक है। इसी वजह से भारत पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक भी है। हालांकि, आगे भारत के सामने कच्चे तेल की उपलब्धता चुनौती बन सकती है। अगस्त में देश में कच्चे तेल की आवक पिछले साल की तुलना में कम रही। अगर यह कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो डीजल के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल रूस और अमेरिका की कमजोर सप्लाई के बीच यूरोप के लिए भारत की अहमियत तेजी से बढ़ी है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।

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