भारत-रूस ने खेला ऐसा मास्टरस्ट्रोक, US-चीन की बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों ने डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए रुपये और रूबल में कारोबार को बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब दोनों देशों के बीच करीब 96 फीसदी लेन-देन इन्हीं दो स्थानीय मुद्राओं में पूरा हो रहा है।

इस भुगतान व्यवस्था ने दोनों देशों के कारोबार को काफी आसान बनाया है। बताया जा रहा है कि करीब 90 फीसदी ट्रांजैक्शन 10 मिनट के भीतर पूरे हो जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में भुगतान एक मिनट से भी कम समय में पूरा हो रहा है।

70 अरब डॉलर तक पहुंचा कारोबार

भारत और रूस के बीच व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा उछाल आया है। 2024 में दोनों देशों का कारोबार करीब 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। रूस से भारत की खरीद में कच्चे तेल की सबसे बड़ी भूमिका रही है। इसके अलावा कोयला, खाद और अन्य जरूरी सामान भी रूस से भारत आता है।

वहीं भारत रूस को मशीनरी, दवाइयां, रसायन, इलेक्ट्रिकल सामान और कृषि उत्पाद निर्यात करता है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस व्यापार को और बढ़ाना है।

2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य

रुपया-रूबल में बढ़ता कारोबार भारत और रूस को अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए नए विकल्प दे रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में भारत-रूस की बढ़ती आर्थिक साझेदारी वैश्विक व्यापार में भी अहम बदलाव का संकेत दे रही है।

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