जांच में कुछ पंचायतों में निर्धारित संख्या में सोलर लाइट नहीं लगाए जाने के बावजूद अभिलेखों में काम पूरा दिखाकर भुगतान किए जाने की शिकायतें मिली हैं। कई स्थानों पर भौतिक सत्यापन के दौरान काम अधूरा मिला। इसके अलावा योजना की स्वीकृति, सामग्री की खरीद, आपूर्ति, स्थापना और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं।
ग्रामसभा से लगातार दूरी भी बनी आधार
कुछ मुखियाओं पर लगातार ग्रामसभा की बैठकों में शामिल नहीं होने और पंचायत के कामकाज में नियमों की अनदेखी करने के आरोप भी हैं। शासन ने इसे पंचायत संचालन में गंभीर लापरवाही माना है।
अब संबंधित मुखियाओं से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जवाब और जांच में आरोप सही पाए जाने पर पंचायत राज अधिनियम के तहत पद से हटाने की कार्रवाई संभव है। विभाग ने साफ संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और कर्मियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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