एसडीओ कोर्ट से अनुमति की जरूरत नहीं
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों और उद्यमियों को जमीन का स्वरूप बदलने के लिए एसडीओ कोर्ट का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। पुरानी व्यवस्था में संपरिवर्तन के लिए शुल्क के साथ कई तरह की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती थीं। कानून खत्म होने से इस प्रक्रिया में समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
कारोबार और उद्योग को मिल सकती है रफ्तार
सरकार का मानना है कि भूमि उपयोग से जुड़ी जटिल प्रक्रिया कम होने से राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्योग, गोदाम, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जमीन का इस्तेमाल करना आसान हो सकता है। इससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
राजस्व अदालतों में बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं
संपरिवर्तन मामलों की सुनवाई के लिए एसडीओ कोर्ट में लगाए गए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उपकरण अब राजस्व न्यायालयों में स्थानांतरित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य राजस्व अदालतों को आधुनिक और डिजिटल बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत भूमि विवादों की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से भी की जा सकेगी। पक्षकार अपने दस्तावेज और साक्ष्य डिजिटल पोर्टल के जरिए जमा कर सकेंगे। इससे मामलों की सुनवाई में पारदर्शिता बढ़ने और लोगों को अदालतों के चक्कर कम लगाने पड़ने की उम्मीद है।
.png)
0 comments:
Post a Comment