सोलर पंप पर मिलती है आर्थिक मदद
पीएम-कुसुम योजना के तहत पात्र किसानों को सोलर पंप और सौर ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सरकारी सहायता मिल सकती है। सब्सिडी का स्तर परियोजना, राज्य और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इससे किसानों के लिए सोलर पंप लगवाने का शुरुआती खर्च कम करने में मदद मिलती है।
डीजल और बिजली का खर्च होगा कम
सोलर पंप से खेतों की सिंचाई के लिए सूरज की रोशनी से बिजली तैयार की जाती है। इससे डीजल पंप पर निर्भरता घट सकती है और बिजली की लागत में भी बचत हो सकती है। लंबे समय में यह किसानों के सिंचाई खर्च को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
खाली जमीन से कमाई का मौका
योजना के एक हिस्से के तहत किसान अपनी बंजर या अनुपयोगी जमीन पर सोलर पावर प्लांट लगाने से जुड़ी परियोजनाओं में भाग ले सकते हैं। पैदा होने वाली बिजली को निर्धारित व्यवस्था के तहत डिस्कॉम को बेचने का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है। इससे जमीन से अतिरिक्त आय का रास्ता बन सकता है।
योजना के तीन प्रमुख हिस्से
कंपोनेंट A में जमीन पर सोलर पावर प्लांट लगाने से जुड़ी व्यवस्था है। कंपोनेंट B के तहत स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंप लगाए जाते हैं, जबकि कंपोनेंट C में पहले से चल रहे ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने पर जोर है।
किसानों को आवेदन, पात्रता और सब्सिडी से जुड़ी जानकारी अपने राज्य की संबंधित एजेंसी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी से जरूर जांचनी चाहिए।

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