सरकार ने प्रस्ताव तैयार करने के लिए जिलाधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इसमें किसी क्षेत्र की आबादी के साथ उसका क्षेत्रफल, जनसंख्या घनत्व, सीमा, चौहद्दी और थाना संख्या जैसी जानकारियां देनी होंगी। साथ ही कुल कामगारों और कृषि कार्य से जुड़े लोगों का आंकड़ा भी प्रस्ताव में शामिल करना होगा।
नगर निकाय के गठन के लिए आबादी भी महत्वपूर्ण आधार होगी। निर्धारित मानकों के अनुसार विशेष श्रेणी के क्षेत्रों में नगर पंचायत के लिए 9 हजार से अधिक और 30 हजार तक, नगर परिषद के लिए 30 हजार से अधिक और 1.50 लाख तक तथा नगर निगम के लिए 1.50 लाख से अधिक आबादी का प्रावधान है।
सरकार का मकसद छोटे बाजारों और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को नगरीय सुविधाओं से जोड़ना है। नए नगर निकाय बनने के बाद इन इलाकों में सफाई, जलापूर्ति, ड्रेनेज, कूड़ा उठाव और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता आसान होगा।
विभाग ने संबंधित जिलों को 15 सितंबर तक प्रस्ताव अनिवार्य रूप से भेजने का निर्देश दिया है। इसके बाद प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर नए नगर निकायों के गठन और मौजूदा निकायों के विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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