सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में खाने के तेल के दाम घटने की उम्मीद है। पिछले एक साल में वनस्पति तेल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। त्योहारों के दौरान मिठाई, नमकीन और तली हुई चीजों की मांग बढ़ने के कारण खाद्य तेल की खपत भी बढ़ जाती है।
सूरजमुखी तेल पर सबसे बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत कच्चे पाम ऑयल और कच्चे सोयाबीन तेल की बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी 10 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं कच्चे सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य किया गया है। रिफाइंड पाम और सोयाबीन तेल पर भी ड्यूटी 32.5 से घटाकर 27.5 प्रतिशत कर दी गई है।
कच्चे सूरजमुखी तेल पर सभी संबंधित शुल्कों को मिलाकर कुल आयात शुल्क भी पहले के मुकाबले कम हुआ है। इससे रिफाइनिंग कंपनियों के लिए आयात बढ़ाना आसान हो सकता है और बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में राहत मिलने की संभावना है।
भारत अपनी वनस्पति तेल की जरूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में आयात शुल्क में कमी का असर घरेलू खाद्य तेल बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि, खुदरा कीमतों में वास्तविक कमी कितनी और कब होगी, यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आयात और बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।

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