नई दरों में कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने पर शुल्क 50% से घटकर 25% हो गया है। कार्यालय के लिए यह दर 100% से घटकर 50%, मिश्रित उपयोग के लिए 125% से 65% और व्यावसायिक उपयोग के लिए 150% से घटकर 75% कर दी गई है। कृषि जमीन को लघु या बड़े उद्योग के लिए इस्तेमाल करने पर 15% शुल्क लगेगा।
सार्वजनिक सुविधा, यातायात और परिवहन के लिए कृषि, पार्क, खुले स्थान या ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग बदलने पर भी दर 20% से घटाकर 15% की गई है। ये शुल्क संबंधित जमीन के सर्किल रेट को आधार मानकर निकाले जाएंगे।
आवासीय जमीन पर भी बड़ी राहत
आवासीय जमीन को सार्वजनिक सुविधा, यातायात या पार्किंग के लिए इस्तेमाल करने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क शून्य रहेगा। इसी तरह आवासीय भूमि को लघु या बड़े उद्योग के लिए बदलने पर भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर, आवासीय से कार्यालय उपयोग में बदलाव के लिए 25%, जबकि मिश्रित और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए 50-50% शुल्क निर्धारित किया गया है।
6,000 वर्ग मीटर तक फैसला प्राधिकरण ले सकेंगे
नई व्यवस्था में विकास प्राधिकरणों को 6,000 वर्ग मीटर तक के भूखंड का भू-उपयोग बदलने का अधिकार दिया गया है। हालांकि मास्टर प्लान में किसी एक उपयोग की कुल भूमि का बदलाव 1% तक ही किया जा सकेगा। इससे ज्यादा क्षेत्र के मामलों पर निर्णय शासन स्तर से होगा। आवेदन के लिए 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर फीस रखी गई है। बड़े भूखंडों में शुल्क एक समान दर से नहीं, बल्कि तय क्षेत्रफल की श्रेणियों के अनुसार टेलिस्कोपिक तरीके से निकाला जाएगा।
भू-उपयोग परिवर्तन के लिए 22 दिन में देनी होगी संस्तुति
भू-उपयोग परिवर्तन के आवेदन की समीक्षा विकास प्राधिकरण और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग मिलकर करेंगे। दोनों पक्षों को 22 दिनों के भीतर अपनी संस्तुति देनी होगी। जरूरत पड़ने पर 60 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
मंजूरी के बाद प्रस्ताव को सार्वजनिक किया जाएगा और 15 दिन तक आपत्तियां मांगी जाएंगी। शुल्क की मांग जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को 90 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। भुगतान मिलने के बाद अधिकतम 15 दिनों में भू-उपयोग परिवर्तन की सूचना जारी करने का प्रावधान है।
नई व्यवस्था में हर जमीन का उपयोग बदलना संभव नहीं
नई व्यवस्था में कुछ श्रेणी की जमीनों को बदलाव से बाहर रखा गया है। वन, हरित क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, सड़क, रेलवे, पार्किंग, तालाब, जल निकासी, सीवेज, STP, जल संयंत्र, ठोस कचरा प्रबंधन, श्मशान और कब्रिस्तान जैसी जमीनों का निर्धारित भू-उपयोग नहीं बदला जा सकेगा।

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