7,000 रुपये की सीलिंग से होगी गणना
जारी आदेश के मुताबिक बोनस की गणना के लिए 30.4 दिन प्रति माह का आधार लिया गया है। वहीं अधिकतम गणना सीमा 7,000 रुपये मासिक रखी गई है। इस हिसाब से 18.56 दिनों के PLB की रकम करीब 4,274 रुपये बैठती है। यानी जिन कर्मचारियों की वास्तविक मासिक मजदूरी 7,000 रुपये से अधिक है, उनके मामले में भी बोनस की गणना इसी अधिकतम सीमा के आधार पर की जाएगी।
पहले ज्यादा दिनों का मिलता था PLB
AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने इस फैसले पर असंतोष जताया है। उनके मुताबिक, ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण से पहले सिविलियन कर्मचारियों को कई मामलों में 30 से 41 दिन या उससे अधिक का PLB मिलता था।
उनके बताए आंकड़े के अनुसार, 41 दिनों के आधार पर बोनस करीब 9,441 रुपये बनता, जबकि 18.56 दिनों पर यह लगभग 4,274 रुपये है। यानी दोनों के बीच करीब 5,167 रुपये का अंतर बनता है। यह तुलना 7,000 रुपये की समान बोनस-सीलिंग मानकर की गई है।
निगमीकरण के बाद बदला बोनस का गणित
AINPSEF का कहना है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेट DPSU में बदलाव के बाद कर्मचारियों के PLB की अवधि में कमी आई है। संगठन ने इसे कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बताया है। हालांकि, बोनस को लेकर अंतिम भुगतान संबंधित नियमों और TCL के जारी आदेश के अनुसार ही होगा। कर्मचारियों के लिए इस साल त्योहार से पहले मिलने वाली PLB राशि इसी व्यवस्था के तहत तय की गई है।
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