FD कराने वालों के लिए बड़ी खबर! 1 अक्टूबर से बदलेंगे नियम, ग्राहकों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD को भारत में सुरक्षित निवेश के प्रमुख विकल्पों में माना जाता है। अब FD से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। नए प्रावधानों का मुख्य जोर ब्याज दरों की जानकारी को ज्यादा पारदर्शी बनाने और ग्राहकों को सही जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने पर है।

1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?

नए नियमों के तहत बैंक को अपनी टर्म डिपॉजिट की ब्याज दरों की जानकारी पहले से स्पष्ट रूप से उपलब्ध करानी होगी। RBI के अनुसार, घरेलू टर्म डिपॉजिट की ब्याज दरें बैंक खुद तय करते हैं और समान अवधि की जमा के लिए लागू दरों को पारदर्शी तरीके से बताया जाना जरूरी है।

बल्क डिपॉजिट को लेकर भी खास व्यवस्था है। RBI के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों में 3 करोड़ रुपये और उससे अधिक की जमा बल्क डिपॉजिट की श्रेणी में आती है। वहीं कुछ अन्य बैंक श्रेणियों के लिए यह सीमा अलग है।

क्या आपकी पुरानी FD पर असर पड़ेगा?

अगर आपकी FD पहले से चल रही है तो सिर्फ इन नियमों में बदलाव के कारण उसकी तय ब्याज दर और अवधि अपने आप नहीं बदलती। FD की शर्तें उस समय किए गए अनुबंध के अनुसार लागू रहती हैं।

ग्राहकों को क्या फायदा होगा?

नए प्रावधानों से FD कराने से पहले ब्याज दर और संबंधित शर्तों की जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है। ग्राहक बैंक की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी देखकर निवेश से पहले अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकेंगे। ध्यान रखें कि FD की ब्याज दर बैंक, अवधि और जमा की श्रेणी के अनुसार अलग हो सकती है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक बैंकों को घरेलू टर्म डिपॉजिट पर अपनी ब्याज दर तय करने की स्वतंत्रता है।

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