केंद्र सरकार का बड़ा आदेश! देशवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, बिजली की परेशानी होगी दूर

नई दिल्ली। देश में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने बिजली उत्पादन बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार ने 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले 112 से ज्यादा कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता के साथ चलाने का निर्देश दिया है। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी।

बिजली की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी

सरकार का मकसद आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने पर आपूर्ति में किसी तरह की परेशानी न आने देना है। सितंबर में सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 40 फीसदी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का स्टॉक बेहद कम स्तर पर पहुंच गया था। गर्म मौसम और बढ़ती बिजली खपत को इसकी प्रमुख वजहों में बताया गया है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने कैप्टिव पावर प्लांटों को अधिकतम उत्पादन के लिए तैयार रखने का फैसला किया है। कैप्टिव प्लांट आमतौर पर बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होते हैं।

टाटा, रिलायंस समेत कई कंपनियां दायरे में

इस व्यवस्था के दायरे में टाटा, रिलायंस, वेदांता, JSW, हिंडाल्को, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों के संयंत्र भी शामिल बताए गए हैं। अगर इन संयंत्रों में अपनी जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली बचती है, तो उसे पावर एक्सचेंज के माध्यम से बेचने का निर्देश दिया गया है।

आपको बता दें की सरकार ने यह कदम बिजली की उपलब्धता मजबूत रखने की व्यापक तैयारी के तहत उठाया है। बिजली मंत्रालय पहले भी बढ़ती मांग के समय उत्पादन क्षमता उपलब्ध रखने के लिए Section 11 के तहत निर्देश जारी करता रहा है।

हर सप्ताह देनी होगी रिपोर्ट

इन संयंत्रों को बिजली उत्पादन और कोयले की स्थिति पर हर सप्ताह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) को रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में उत्पादन, खुद की खपत, अतिरिक्त बिजली की बिक्री, उपलब्ध क्षमता और कोयले के स्टॉक जैसी जानकारी शामिल होगी। इससे सरकार को बिजली उत्पादन और ईंधन की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने में मदद मिलेगी और मांग बढ़ने की स्थिति में उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा सकेगी।

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