आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्कूल
योजना के तहत पुराने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को प्राथमिकता देते हुए उनका कायाकल्प किया जाएगा। यहां स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर व आईसीटी लैब, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी और तेज इंटरनेट जैसी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है।
छात्रों को केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय रोबोटिक्स, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकी जानकारियों से भी परिचित कराया जाएगा। साथ ही कम्युनिकेशन, डिजिटल स्किल और लीडरशिप जैसी क्षमताओं को विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
पढ़ाई के साथ खेल और कला पर भी जोर
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों में विज्ञान और तकनीक के साथ खेल, कला एवं संस्कृति को भी महत्व दिया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और अन्य खेलों की सुविधाएं बेहतर करने की योजना है। कुछ प्रमुख केंद्रों पर इनडोर स्पोर्ट्स, फिटनेस और अन्य अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।
योजना के सामने चुनौतियां भी
सरकारी स्कूलों को आधुनिक रूप देने के साथ कई चुनौतियां भी सामने हैं। कुछ पुराने विद्यालयों में जगह और बुनियादी ढांचे की कमी है। इसके अलावा तकनीकी विषयों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और डिजिटल संसाधनों को मजबूत करना भी जरूरी होगा। यदि योजना तय रूपरेखा के अनुसार लागू होती है, तो बिहार के चयनित सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाई, तकनीक, खेल और करियर विकास के लिए एक अधिक आधुनिक शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है।

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