रिपोर्ट के अनुसार भारत का स्कोर 39 अंक तक बढ़ा है, जो पिछले साल की तुलना में 1 अंक अधिक है। हालांकि, यह वैश्विक औसत 42 से अभी भी पीछे है। इसका मतलब है कि भ्रष्टाचार अभी भी गंभीर समस्या के रूप में बरकरार है और इसे पूरी तरह दूर करने के लिए और प्रयासों की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार विरोधी पहल को धीमा बताया गया है। वहीं, पत्रकारों की सुरक्षा पर चिंता जताई गई है। भारत उन देशों की सूची में शामिल है जहाँ भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए जोखिम ज्यादा है। ऐसे हालात जवाबदेही बनाए रखना कठिन बनाते हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।
दुनिया भर की तुलना में डेनमार्क 89 अंकों के साथ सबसे कम भ्रष्ट देश बना हुआ है, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे मजबूत लोकतंत्रों में भी भ्रष्टाचार से निपटने के मानक गिरावट पर हैं। सूची के निचले पायदान पर दक्षिण सूडान और सोमालिया हैं, जिनका स्कोर महज 9 है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग और पारदर्शिता में सुधार निवेश और व्यवसाय के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन 39 अंक का स्कोर यह बताता है कि देश को अभी लंबा सफर तय करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत कानूनी ढांचे, जवाबदेही सुनिश्चित करना और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भविष्य में भ्रष्टाचार को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।

0 comments:
Post a Comment