जेट इंजन क्यों है बेहद जरूरी?
लड़ाकू विमान बनाना आसान काम है, लेकिन उसका इंजन तैयार करना दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण तकनीकी चुनौतियों में से एक माना जाता है। वर्तमान में भारत के तेजस और अन्य विमानों में अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के इंजन लगे हैं। कई बार विदेशी तकनीक मिलने में देरी होती है या कड़ी शर्तें रखी जाती हैं।
GTRE का उद्देश्य अब इस निर्भरता को खत्म करना है। नया इंजन पांचवीं पीढ़ी के AMCA विमान और अन्य भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए डिजाइन किया जाएगा। इस इंजन का लक्ष्य 110–130 kN थ्रस्ट उत्पन्न करना है, जो मौजूदा राफेल के 84 kN थ्रस्ट वाले इंजन से भी अधिक शक्तिशाली होगा।
तकनीकी चुनौती और समाधान
आपको बता दें की इस इंजन को बनाने के लिए अत्याधुनिक धातु और कोटिंग की आवश्यकता है, जो हजारों डिग्री तापमान झेल सके। इंजन की आंतरिक प्रणाली इतनी जटिल है कि इसमें विशेष सिरेमिक कोटिंग और अलॉय मटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम (FADEC) का इस्तेमाल होगा, जो पायलट को इंजन की हर गतिविधि की सटीक जानकारी देगा। यह इंजन भारी हथियारों के साथ भी विमान को उच्च गति पर उड़ाने में सक्षम होगा। इसके डिज़ाइन में सुपरसोनिक गति और तेजी से मोड़ लेने की क्षमता को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी
पहले तक रक्षा तकनीक के बड़े प्रोजेक्ट्स सरकारी संस्थानों तक ही सीमित रहते थे, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी से प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा। भारत में जेट इंजन के छोटे-बड़े पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इससे न केवल निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि लागत में भी कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
स्वदेशी जेट इंजन विकसित होने से भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता मिलेगी। विदेशी इंजन पर निर्भरता खत्म होने से सुरक्षा और आपूर्ति में स्थिरता आएगी। साथ ही, भविष्य के लड़ाकू विमानों की कीमत में भी कमी आएगी। इस परियोजना से भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिनके पास खुद की जेट इंजन तकनीक है। यह कदम भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।
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