योजना के मुख्य लाभ
सब्सिडी का फायदा: परियोजना लागत के 60% तक की आर्थिक सहायता।
सिंचाई सुविधा: सोलर पंप से खेतों में बेहतर और लागत-रहित सिंचाई।
अतिरिक्त आमदनी: सोलर पंप द्वारा उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को सरकारी नेटवर्क में बेचकर लाभ।
ऊर्जा बचत और पर्यावरण सुरक्षा: डीजल पर निर्भरता कम होने से लागत घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
योजना के घटक
1 .विकेंद्रीकृत ग्रिड-कनेक्टेड सौर या नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र – अधिकतम 70% ऋण सहायता।
2 .स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंप – परियोजना लागत का 30% सहायता।
3 .ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंप का सौराइजेशन – परियोजना लागत का 30% सहायता।
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सब्सिडी प्रदान करती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति, वनटांगिया और मुसहर किसानों के लिए 70% सब्सिडी देगी, जबकि अन्य किसानों को 60% सब्सिडी मिलेगी।
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना के लिए व्यक्तिगत किसान, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), जल उपयोगकर्ता संघ (डब्ल्यूयूए) और किसानों के समूह पात्र हैं। आवेदन के लिए पहचान प्रमाण, पता प्रमाण, भूमि स्वामित्व और बैंक खाता विवरण आवश्यक है।
आवेदन प्रक्रिया
इच्छुक किसान UPNEDA पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर आवेदन दर्ज करने के बाद UPNEDA द्वारा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। किसान आवेदन की प्रगति ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं और किसी भी शिकायत का समाधान भी इसी पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं।
किसान कैसे बनें ऊर्जादाता?
पीएम-कुसुम सी-1 योजना न केवल किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा देती है, बल्कि उन्हें अपनी खेतों में सोलर पंप से बिजली उत्पादन और बेचने का मौका भी देती है। इससे किसान की आय बढ़ती है, ऊर्जा लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान होता है। यूपी और अन्य राज्यों में यह योजना किसानों के लिए एक नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है और उन्हें पारंपरिक खेती के अलावा ऊर्जा उत्पादन में भी सक्रिय बना रही है।
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