स्वदेशी मिसाइलों की ताकत
भारत ने विभिन्न श्रेणियों में मिसाइलों का विकास किया है, जिसमें बैलिस्टिक, क्रूज, हाइपरसोनिक और एंटी-सैटेलाइट मिसाइलें शामिल हैं। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की मेहनत से तैयार हुई ये मिसाइलें लंबी दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम हैं। खास बात यह है कि अब भारत की मिसाइल क्षमता कई परंपरागत सुपरपावर देशों जैसे अमेरिका, रूस और चीन के करीब पहुँच चुकी है।
रणनीतिक बढ़त और सुरक्षा
स्वदेशी मिसाइल तकनीक से भारत को रणनीतिक मजबूती मिली है। दुश्मनों के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी सीमाओं और क्षेत्रीय हितों की रक्षा में सक्षम है। इस तकनीक की मदद से भारत अब लंबी दूरी पर हवाई और समुद्री खतरों का सामना कर सकता है और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
अंतरिक्ष और एंटी-सैटेलाइट मिसाइलें
भारत ने 2019 में एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण भी सफलतापूर्वक किए हैं। इससे देश को अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अपनी सुरक्षा बढ़ाने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में भारत की सामरिक और अंतरिक्ष क्षमताओं में नई क्रांति ला सकती है।
भारत के पास अब सभी तरह की मिसाइलें मौजूद
वर्तमान में भारत के पास ICBM, SLBM से लेकर क्रूज मिसाइलें, हाइपरसोनिक मिसाइलें, एयर टू एयर मिसाइलें सभी तरह की मिसाइलें मौजूद हैं। साथ ही दुश्मन देश की मिसाइलों को रोकने के लिए भारत के पास ताकतवर एयरडिफ़ेंस सिस्टम भी मौजूद हैं।

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