भारत ने 2018 में पांच S-400 स्क्वाड्रन का पहला करार किया था, जिनमें से चार की डिलीवरी हो चुकी है। आखिरी स्क्वाड्रन के इस साल नवंबर तक मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नए करार पर सहमति बनने के बाद अतिरिक्त सिस्टम की डिलीवरी लगभग तीन साल बाद शुरू हो सकती है।
पूर्वी और पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ेगी ताकत
अतिरिक्त S-400 इकाइयों को भारत के पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर तैनात करने की योजना है। इससे देश का बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क और मजबूत होगा तथा लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी S-400 प्रणाली की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया था। भारतीय वायुसेना अधिकारियों के अनुसार, इस एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के हवाई अभियानों को रोकने में अहम भूमिका निभाई।
भारत सिर्फ विदेशी सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना चाहता। देश प्रोजेक्ट कुशा के तहत स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली भी विकसित कर रहा है। साथ ही मिशन सुदर्शन चक्र के जरिए देशभर में एक मजबूत हवाई सुरक्षा कवच तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है।
अगर पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन का सौदा आगे बढ़ता है, तो भारत की एयर डिफेंस क्षमता को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम फैसला और आधिकारिक समझौते का इंतजार रहेगा।

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